Technovedant Chapter 2

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Wednesday, December 30, 2020

December 30, 2020

गूगल एडसेंस क्‍या है कैसे काम करता है

अगर आप एक ब्‍लागर हैं, यूटयूबर हैं या कोई एंड्रॉयड एप्लिकेशन डेवलपर हैं तो आप गूगल एडसेंस के विषय में बहुत अच्‍छे से जानते होंगे अगर आप एक नई वेबसाइट या ब्‍लाग बनाने के बारे में विचार कर रहे हैं तो एडसेंस के बारे में आपके मन में जिज्ञासा उत्‍पन्‍न हुई होगी अगर बात हो ऑनलाइन अर्निंग की तो गूगल एडसेंस का नाम सबसे पहले आता है इस पोस्‍ट में हम जानने वाले हैं कि गूगल एडसेंस क्‍या है, किस तरह से काम करता है पब्लिशर होने के नाते या विज्ञापन दाता होने के नाते गूगल एडसेंस आपके लिए क्‍यों महत्‍वपूर्ण है

गूगल एडसेंस क्‍या है

गूगल एडसेंस गूगल का सबसे बडा बिजनेस मॉडयूल है जो किसी भी ऑनलाइन सामग्री पर विज्ञापन दिखाता है यह ऑनलाइन पैसे कमाने का सबसे सरल और आसान माध्‍यम है तथा ऑनलाइन विज्ञापन कंपनियों में सबसे अग्रणी कंपनी गूगल का सबसे बडा बिजनेस मॉडयूल भी है आसान शब्‍दों में कहें तो गूगल एडसेंस गूगल, एडवरटाइजर और पब्लिशर के बीच में एक ब्रिज का काम करता है सारा काम ऑटोमैटिक माध्‍यम से किया जाता है आपको बस एक कोड अपने वेबसाइट पर लगाना है और गूगल एडसेंस काम करना शुरू कर देता है 

गूगल एडसेंस सबसे विश्‍व‍सनीय प्‍लेटफार्म क्‍यों है

गूगल एडसेंस का विज्ञापन दिखाने का तरीका अन्‍य विज्ञापन नेटवर्क से बिल्‍कुल भिन्‍न है गूगल एडसेंस किसी वेबसाइट या ब्‍लाग पर आने वाले विजिटर्स को उनकी पसंद के प्रासंगिक विज्ञापनों को ही दिखाता है यानी जिस वेबसाइट पर गूगल एडसेंस के विज्ञापन कोड लगे हुए हैं वहां केवल आप उन्‍हीं विज्ञापनों को देखेंगे जिसमें आप रूचि रखते हैं यह पूरा सिस्‍टम किस तरह से काम करता है आइए समझते हैं

जब आप अपने ब्राउजर में या अपने मोबाइल में अपने की बोर्ड से कुछ भी टाइप करते हैं यानी तकनीकी भाषा में कहें तो की-वर्ड टाइप करते हैं तो यह जानकारी आपके इंटरनेट ब्राउजर में सुरक्षित हो जाती है आपके द्वारा सर्च की गई इस जानकारी को तकनीकी भाषा में कुकी कहा जाता है अब जब आप दोबारा किसी ऐसे ब्‍लाग, वेबसाइट या यूटयूब चैनल पर जाते हैं जहां पर गूगल एडसेंस के विज्ञापन कोड लगे हुए हैं तो वह कोड सबसे पहले आपके ब्राउजर में सुरक्षित उस कुकी को पढते हैं और उससे पता लगाते हैं कि आपने पिछली बार क्‍या सर्च किया था जिससे वह आपके द्वारा सर्च किये गये की-वर्डस के आधार पर आपको विज्ञापन प्रदर्शित कर सकें

एक तरह से देखा जाए तो गूगल विज्ञापन आपकी व्‍यक्तिगत जानकारी को आपकी बिना परमीशन के पढकर आपको दिखाता है वह विज्ञापनदाताओं के साथ में भी इस जानकारी को शेयर करता है ताकि रीडर को और भी सटीक विज्ञापन दिखाये जा सकें 

आइए एडसेंस के बिजनेस मॉडयूल को समझते हैं

गूगल एडसेंस किसी वेबसाइड पर विज्ञापन प्रदर्शित करता है और उस वेबसाइट पर आने वाले ट्रैफिक/ रीडर्स को उनके प्रासंगिक विज्ञापनों को दिखाता है जिससे सभी को फायदा होता है अगर मैं सभी की बात करूं तो इसमें चार लोग शामिल होते हैं 
  1. गूगल- एक आंकडे के अनुसार गूगल का 99 प्रतिशत आय का हिस्‍सा वेबसाइट और ब्‍लाग पर प्रदर्शित होने वाले विज्ञापनों से ही आता है बाकी एक प्रतिशत अन्‍य संसाधनों से लेकिन यहां समझने वाली बात यह है कि इन सभी विज्ञापनों के लिए गूगल पब्लिशियर पर निर्भर रहता है गूगल 85 प्रतिशत विज्ञापन पब्लिशियर के माध्‍यम से प्रदर्शित करता है बाकी अपने सर्च होम पेज पर तो इस तरह से सबसे बडा फायदा गूगल एडसेंस के विज्ञापनों से गूगल का होता है 
  2. पब्लिशर- गूगल एडसेंस का सबसे बडा दूसरा फायदा उन पब्लिशियर्स का होता है जो गूगल एडसेंस के विज्ञापन अपने ब्‍लाग या वेबसाइट पर लगाते हैं वेबसाइट पर आने वाले ट्रैफिक को गूगल एडस पर विज्ञापनदाताओं द्वारा दिये गये विज्ञापनों को प्रदर्शित किया जाता है जिसके बदले गूगल एडसेंस क्लिक और इम्‍प्रेशन के हिसाब से पब्लिशियर को पेमेंट देता है जिसमें कुछ भाग गूगल का होता है और कुछ भाग पब्लिशियर का होता है इसमें पब्लिशियर का सबसे बडा फायदा यह है कि उसको विज्ञापन लेने के लिए कहीं जाना नहीं है गूगल एडसेंस विज्ञापनों का प्‍लेसमेंट खुद व खुद करता रहता है अपनी वेबसाइट पर जहां-जहां पर पब्लिशियर ने गूगल एडसेंस के एड कोड लगाये हैं 
  3. विज्ञापनदाता कंपनी- तीसरे नंबर पर विज्ञापनदाता कंपनी को यह लाभ होता है कि उसके विज्ञापन केवल वहां दिखाये जाते हैं जहां उसकी जरूरत होती है बहुत कम बजट में बहुत ज्‍यादा लोगों के बीच में विज्ञापन पहुंचता है विज्ञापनदाता अपनी मर्जी से अपने विज्ञापन की कीमत तय कर सकता है इस पूरे सिस्‍टम में इतनी पारदर्शिता से काम किया जाता है कि विज्ञापनदाता बडे आराम से इस सिस्‍टम पर भरोसा करके अपने व्‍यापार को बढा सकते हैं विज्ञापनदाता के पास पूरा नियंत्रण रहता है कि किस तरह के विज्ञापन अपने वेबसाइट पर दिखाने हैं और किस तरह के नहीं 
  4. रीडर्स - इस सब में रीडर्स का सबसे बडा फायदा होता है चूंकि पब्लिशर रीडर्स के लिए ढेर सारा निशुल्‍क कन्‍टेंट तैयार करते हैं जिसके लिए उन्‍हें एक भी रूपया चार्ज नहीं देना पडता है और उन्‍हें फ्री में ढेर सारी जानकारी हमेशा मिलती रहती है 

एडसेंस ही क्‍यों बेहतर है 

अन्‍य विज्ञापन नेटवर्क के मुकाबले एडसेंस ही क्‍यों ज्‍यादा बेहतर विकल्‍प है इसके कुछ प्रमुख कारण हैं 

आसान इंटरफेस

एडसेंस को इस्‍तेमाल करने के लिए आपको सिर्फ एक छोटा सा कोड अपने ब्‍लाग या वेबसाइट पर पेस्‍ट करना होता है एवं बाकी सारा काम एडसेंस खुद ब खुद कर देता है विज्ञापनों का प्‍लेसमेंट और उसपर होने वाले क्लिक और इम्‍प्रैशन और उस पर होने वाली कमाई को आप आसानी से देख सकते हैं अपने विज्ञापनों को आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं 

आसान नियंत्रण 

एडसेंस का डैशबोर्ड बहुत ही सरल है जिससे आप आसानी से अपनी वेबसाइट पर विज्ञापनों को अपनी सुविधानुसार नियंत्रित कर सकते हैं आप यह भी तय कर सकते हैं कि कौन सा विज्ञापन कहां दिखाना है और कहां नहीं यहां तक कि आप कुछ विज्ञापनदाताओं को अपनी मर्जी के अनुसार ब्‍लाक भी कर सकते हैं 

अधिक विज्ञापनदाताओं का होना 

गूगल एडसेंस के विज्ञापन गूगल एड से आते हैं जिसके पास विज्ञापनदाताओं का एक बहुत विशाल श्रोत है गूगल एड एक ऐसा प्‍लेटफार्म है जहां पर दुनियाभर के विज्ञापनदाता अपना विज्ञापन देते हैं और वह विज्ञापन गूगल एडसेंस के माध्‍यम से प्रदर्शित किये जाते हैं इसलिए गूगल के पास विज्ञापनों की कोई कमी नहीं होती है

गूगल एडसेंस से कितनी कमाई होती है 

इस बात को कहना मुश्किल है कि आप गूगल एडसेंस से कितना कमाते हैं आपकी कमाई इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी साइट पर कितना ट्रैफिक है, यह ट्रैफिक किस देश से आ रहा है, आप किस तरह का कंटेंट पब्लिश कर रहे हैं और आपने अपने विज्ञापन किस तरह से सेट किये हैं 

यह देखने के लिये आप गूगल एडसेंस से कितना कमा सकते हैं आप गूगल एडसेंस के होम पेज पर जाकर आय कैल्‍यूलेटर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं  यहां से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आप गूगल एडसेंस से कितनी कमाई कर सकते हैं 

क्‍या कोई भी गूगल एडसेंस एकाउण्‍ट रजिस्‍टर करा सकता है

कोई भी व्‍यक्ति गूगल एडसेंस रजिस्‍टर करा सकता है जिसके पास एक ब्‍लाग एक वेबसाइट एक यूटयूब चैनल या एक एंड्रॉयड एप्लिकेशन है गूगल एडसेंस एक पारदर्शी एड नेटवर्क प्रोग्राम है जो विज्ञापनदाताओं के लिए बना है और यह हर तरह से यह चाहता है कि विज्ञापनदाताओं के साथ में किसी तरह की धोखाधडी न हो या उनके पैसे बेकार न जायें इसलिए गूगल एडसेंस पर अप्लाई करने से पहले आपको गूगल एडसेंस के नियम और शर्तें जानना बहुत जरूरी है 

गूगल हमेशा चाहता है कि विज्ञापन उसी व्‍यक्ति को दिखाई दें जिसके लिए वह बने हैं अर्थात विज्ञापनों पर सामान्‍य तरीके से ही क्लिक होनी चाहिए गूगल का सबसे बडा रूल यह है कि आप अपने विज्ञापन पर कभी भी क्लिक नहीं करेंगे और न ही अपने दोस्‍तों, रिश्‍तेदारों या आस-पडोस से कहकर क्लिक करायेंगे ऐसा करने से आपका गूगल अकाउण्‍ट सस्‍पेंड किया जा सकता है इसके अलावा और भी नियम और शर्तें हैं जिन्‍हें हम आगे जानते हैं - 

ओरिजिनल कांटेंट

आप हमेशा अपनी वेबसाइट पर ओरीजनल कन्‍टेंट ही पब्लिश करेंगे कहीं से कॉपी पेस्‍ट नहीं करेंगे ऐसा करने से आपका एडसेंस अकाउण्‍ट खतरे में आ सकता है 

ट्रैफिक सोर्स

गूगल हमेशा चाहता है कि आपकी साइट पर ट्रैफिक सोर्स हमेशा सही होना चाहिए, यानी कहीं से भी गलत तरीके का ट्रैफिक आपकी वेबसाइट पर नहीं आना चाहिए आइये ट्रैफिक सोर्स को समझते हैं - 
  1. ऑर्गेनिक ट्रैफिक- ऑर्गेनिक ट्रैफिक किसी वेबसाइट पर आने वाला सबसे बढिया ट्रैफिक माना जाता है जो सीधे सर्च इंजन से आता है यानी यूजर को जब कुछ खोजना होता है तो वह गूगल सर्च इंजन पर जाता है और वहां कीवर्ड टाइप करता है जिसके बाद गूगल इंडैक्‍श की गई वेबसाइट या ब्‍लाग के रिजल्‍टस पब्लिश करता है जिससे यूजर उस वेबसाइट या ब्‍लाग पर पहुंच पाता है तकनीकी भाषा में इसे ऑर्गेनिक या प्राकृतिक ट्रैफिक कहते हैं 
  2. सोशल मीडिया ट्रैफिक- जब आप सोशल मीडिया पर अपने कांटेंट को शेयर करते हैं तो वहां से जो ट्रैफिक आपके वेबसाइट या ब्‍लाग पर आता है उसे सोशल मीडिया ट्रैफिक कहते हैं 
  3. एफीलिएट ट्रैफिक- जब आप किसी अन्‍य वेबसाइट, ब्‍लाग पर कमेंट करके अपने ब्‍लाग या वेबसाइट का लिंक छोडते हैं या किसी ब्‍लाग या वेबसाइट पर गैस कोड लिखते हैं और आपको वहां से जो ट्रैफिक प्राप्‍त होता है उसे एफिलिएट ट्रैफिक कहते हैं
  4. विज्ञापन के माध्‍यम से- ऑनलाइन विज्ञापनों से ट्रैफिक आना आज के समय में बहुत आम बात बन गई है इसके लिए विज्ञापन नेटवर्क का इस्‍तेमाल किया जाता है गूगल की पालिसी के अनुसार ऑनलाइन ट्रैफिक का विज्ञापन तभी अच्‍छा माना जाता है जब वह गूगल के लैंडिंग पेज (वह पेज जिसके लिए विज्ञापन किया गया हो) दिशा-निर्देशों का पालन करता हो उपयोगकर्ता को कहीं और न ले जाता हो 
  5. डायरैक्‍ट ट्रैफिक- जब उपयोगकर्ता आपकी वेबसाइट या ब्‍लाग का नाम सीधे ब्राउजर के एड्रैस वार में टाइप करके आपके वेबसाइट तक पहुंचते हैं तो वह ट्रैफिक डायरैक्‍ट ट्रैफिक माना जाता है 

साइट नैवीगेशन

गूगल एडसेंस की पॉलिसी के अनुसार आपकी वेबसाइट का नैवीगेशन में गुमराह करने वाले तरीकों का इस्‍तेमाल नहीं होना चाहिए आप अपने विज्ञापनों पर क्लिक और विज्ञापन बढाने के लिए अपने नैवीगेशनों का इस्‍तेमाल नहीं कर सकते हैं आप विज्ञापनों को ऐसी जगह नहीं डाल सकते जहां उन्‍हें आपकी साइट का हिस्‍सा समझा जाए जैसे मेन्यू या डाउनलोड लिंक इत्‍यादि 

आइये जानते हैं गूगल की प्रकाशित नीतियों के बारे में 


अभी हमने गूगल की विज्ञापन नीतियों को जाना था लेकिन यदि आप गूगल एडसेंस का अप्रूवल लेना चाहते हैं तो आपको गूगल प्रकाशक नीतियों के बारे में भी जानना बहुत जरूरी है गूगल पब्लिशीयर्स को अपने कन्‍टेंट से कमाई करने की सुविधा देता है इसका अर्थ यह नहीं है कि आप कुछ भी पब्लिश करने लग जायेंगे और उनपर गूगल विज्ञापन प्रदर्शित करेगा इसके लिए आपको गूगल की प्रकाशक नीतियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है - 
  1. आप ऐसा कोई भी कन्‍टेंट प्रकाशित नहीं कर सकते जो किसी भी गैर कानूनी गतिविधि को बढावा देता हो या किसी भी व्‍यक्ति के कानूनी अधिकारों का उल्‍लंघन करता हो 
  2. आप किसी भी नकली सामान की बिक्री या उसका प्रचार-प्रसार नहीं कर सकते जिसमें असली एवं नकली में फर्क कर पाना मुश्किल होता है 
  3. आप किसी की बौद्विक सम्‍पत्ति का इस्‍तेमाल यानी कॉपीराइट का उल्‍लंघन नहीं कर सकते यदि आप ऐसा होता देखते भी हैं तो आप डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट ऐक्ट (डीएमसीए) के तहत कॉपी राइट उल्‍लंघन की शिकायत कर सकते हैं 
  4. आप झूठे, बेईमानी करने वाले उत्‍पात या सेवाओं का प्रचार नहीं कर सकते 
  5. आप उपयोगकर्ताओं को आधी-अधूरी जानकारी देने वाले कन्‍टेंट नहीं प्रदर्शित कर सकते इसके अलावा आप विस्‍तार से Google प्रकाशक से जुड़ी नीतियां पढ सकते हैं और ज्‍यादा जानकारी प्राप्‍त कर सकते हैं 

निष्‍कर्ष

गूगल एडसेंस अगर गूगल से कमाई करने का सबसे सरल और आसान तरीका है तो यहां गूगल भी यह चाहता है कि आप पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ काम करें कोई भी धोखाधडी न करें अपने और विज्ञापनदाता के बीच पारदर्शिता रखें अगर आप बहुत लंबे समय तक गूगल एडसेंस से अच्‍छी खासी कमाई करना चाहते हैं तो उसके बहुत सारे तरीके हैं 

आशा है आप समझ गये होंगे कि गूगल एडसेंस क्‍या है और किस तरह काम करता है एडसेंस के लिए आपको खुद को किस तरह से तैयार करना है वैसे तो हमने यहां समस्‍त जानकारी देने की कोशिश की है, लेकिन फिर भी अगर कोई पाइंट रह गया हो तो आप हमसे कमेंट करके पूछ सकते हैं या सुझाव दे सकते हैं आपके बहुमूल्‍य विचारों और सुझावों का स्‍वागत है आपका दिन शुभ हो 

Tuesday, June 16, 2020

June 16, 2020

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस क्या है ? What Is MS Office In Hindi

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस क्या है ? What Is MS Office In Hindi- अगर आपने कभी Computer प्रयोग किया है या भविष्‍य में कभी करने वाले हैं तो Microsoft Office क्‍या है इसके बारे में जानना बहुत जरूरी है माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस को (MS Office) के नाम से भी जाना जाता है नया Computer लेते समय या Computer सीखने की शुरूआत करते समय सबसे पहले Microsoft Office की जानकारी लेनी होती है इस Post में हम जानने वाले हैं Microsoft Office के बारे में Complete Information माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस क्‍या है ओर इसके Component क्‍या हैं 
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माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस क्या है ? What Is MS Office In Hindi

एम एस ऑफिस क्या है - What is MS office in Hindi 

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस MS Office दुनिया का सबसे Popular Office Suite है Suite का मतलब एक जैसे Computer Programs का एक सेट होता है यह program एक दूसरे से Data share कर सकते हैं इनके Tools भी लगभग लगभग एक समान होते हैं इस लिए इन्‍हें सुइट कहा जाता है Ms Suite में ऑफिस में काम आने वाले सभी program का एक सेट बनाया गया है जिससे आपका Office work और भी आसान हो जाता है Office में कई प्रकार के कार्य होते हैं जैसे लेटर बनाना Spreadsheet तैयार करना, Presentation तैयार करना, email भेजना, Database Management करना आदि

माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का इतिहास- History of Microsoft Office in Hindi 

Office के सभी कार्यों के लिए Microsoft ने नवम्‍बर 2090 में Computer software का एक ऐसा package तैयार किया जिसके द्वारा Computer के माध्‍यम से Office का सारा कार्य किया जा सकता था इस Program में वह सभी कार्य हो सकते थे जो एक Office के लिए जरूरी थे इससे पहले Type writer के द्वारा Letter type किये जाते थे परन्‍तु कोई भी File Save नहीं की जा सकती थी यदि कोई गलती हो गई तो दोबारा से पूरा Matter type करना पडता था लेकिन Computer program में सबसे बडी सुविधा इसी बात की थी कि आप अपने Matter में कभी भी Correction कर सकते थे तथा उसे सुरक्षित रख सकते थे एवं जब चाहो तब Print निकाल सकते थे 

Microsoft Office C++ Programming भाषा में तैयार किया गया Microsoft Office Microsoft Office Programming Software है Microsoft Office को 1969 में Apple के Make operating system के लिए बनाया गया था और Microsoft windows operating system के लिए 1990 में Microsoft Office का प्रथम संस्‍करण जारी किया गया जो कि Microsoft Office का 3.0 Version था Microsoft company के Founder बिल गेटस (Bill Gates) हैं जो दुनिया के सबसे अमीर व्‍यक्तियों की सूची में आते हैं 

एमएस ऑफिस ट्यूटोरियल हिंदी में - Complete MS Office Tutorial in Hindi


माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस के घटक - Component of Microsoft Office in Hindi 

  • माइक्रोसॉफ्ट वर्ड (Microsoft Word)
  • माइक्रोसॉफ्ट ऍक्सेल (Microsoft Excel)
  • माइक्रोसॉफ्ट पावरप्वाइण्ट (Microsoft PowerPoint)
  • माइक्रोसॉफ्ट एक्सेस (Microsoft Access)
  • माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक (Microsoft Outlook)
इनमें से जो Applications सबसे ज्‍यादा प्रयोग में आते हैं अब चलिये उनके बारे में संक्षिप्‍त जानकारी ले लेते हैं -  

माइक्रोसॉफ्ट वर्ड क्‍या है - What is Microsoft Word in Hindi 

Microsoft Word दुनिया का सबसे लोकप्रिय Word Processors है Word Processors ऐसा Software होता है जिसकी मदद से हम कोई भी Document को तेजी से बना सकते हैं उसमें बदलाव कर सकते हैं उसमें वे सारे Tools होते हैं जो किसी भी Document को बनाने के लिए जरूरी होते हैं इससे आप Letter, Resume, Application, Invitation आदि आसानी से Type कर सकते है Microsoft Word दुनियाभर के कार्यालयों में सबसे ज्‍यादा प्रयोग की जाने वाली Application है

एम एस वर्ड में सीखें ऑफिस वर्क - Learn office work in MS Word


माइक्रोसॉफ्ट एक्‍सेल क्‍या है - What is Microsoft Excel

Microsoft excel को Ms Excel या Excel के नाम से भी जाना जाता है यह एक Spreadsheet Program है जो Data को Tabular Format में तैयार करने के काम में लायी जाती है Ms Word के बाद यह दूसरा और सबसे ज्‍यादा प्रयोग में लाया जाने वाला Software है इसकी विशेषताओं की वजह से यह लाखों Accountant ओर Office Employee की पहली पसंद है अगर आपको Microsoft Excel चलाना आता है तो आप ऑफिस के कई घण्‍टों का काम मिनटों में कर सकते हैं

Microsoft excel के अन्‍दर ढेर सारे Formulae दिये गये होते हैं जिसे किसी भी Spreadsheet पर Apply करने पर बडी जटिल Calculation भी मिनटों में Automatic तरीके से की जा सकती है इन Formulas को आप अगर एक बार Sheet में Save कर लेते हैं तो हर महीने Repeat होने वाले कामों को आप चुटकियों में तैयार कर सकते हैं Microsoft excel में बडी आसानी से Salary chart, Office employee, Database management, Billing Software, stock management Software तैयार किये जा सकते हैं

एम एस एक्‍सेल में सीखें ऑफिस वर्क - Learn office work in MS Excel in Hindi 


माइक्रोसॉफ्ट पावर पॉइंट क्‍या है - What is Microsoft Power Point in Hindi

Microsoft Power Point अगर किसी को आपको बेहतर तरीके से कुछ समझाना हो तो Presentation से बेहतर बिकल्‍प हो ही नहीं सकता Microsoft Power Point एक Presentation program है जिसमें Slide format में तैयार किया जाता है जिसमें Multimedia (Photo, Sound, Animation, Graphics, Graph, Video और Text ) का प्रयोग करके Presentation तैयार की जाती है Microsoft Power Point किसी भी कार्यालय में Presentation देने में कार्यशाला में Training देने में बहुत काम आता है और सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है

पावर पाइंट सीखें एक ही वीडियो में - Learn Complete Power Point Hindi


माइक्रोसॉफ्ट एक्‍सेस क्‍या है - What is Microsoft Access in Hindi 

Microsoft Access एक Database Management Software है इसका उपयोग Database file बनाने Database को Manage करने Database का विश्‍लेषण करने और एक ही Database पर कई प्रकार की अलग-अलग Report को तैयार करने में किया जाता है Database को Store करने के लिए इसमें बडे ही आसान फार्म तैयार किये जाते हैं जिसमें Drop Down Menu, Text Box, Button आदि का प्रयोग किया जाता है जिसकी सहायता से कोई भी User बडी आसानी के साथ Data entry कर सकता है ये सारा Data एक Basic Spreadsheet में Save होता रहता है जिसे आसानी से अन्‍य किसी भी Database Management software में Export किया जा सकता है साथ ही अगर आप चाहें तो MS Excl में भी उस File को ले जा सकते हैं कई मायनों में ये Software excel से भी बेहतर काम कर सकता है -

माइक्रोसॉफ्ट एक्‍सेस सीखें - Learn Microsoft access in Hindi 


माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक क्‍या है - What is Microsoft Outlook in Hindi 

Microsoft Outlook एक Personal information manager है इसे Outlook Express के नाम से भी जाना जाता है इसमें आप अपने किसी भी email Address को Offline ओर Online Manage कर सकते हो यानी अगर आप एक बार Outlook express में अपने Email address से Login कर लेते तब आपको Email भेजने Receive करने के लिए Web Browser ओपन करने की कोई आवश्‍यकता नहीं रहती है इसके साथ ही आप Outlook में Calendar Management, Task manager, Contact Manager और Notebook जैसी सुविधाओं को भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं

माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक सीखें - Learn Microsoft Outlook in Hindi 



आशा है आप समझ गये होंगे Microsoft Office Suite क्‍या होता है इसके मुख्‍य Components कौन कौन से हैं अगर ये जानकारी आपको पसंद आई हो तो अपने दोस्‍तों के साथ इसे जरूर Share करें आपका दिन शुभ हो धन्‍यवाद 

Monday, November 12, 2018

November 12, 2018

लिनक्स क्या है - What is linux in Hindi

लिनक्स (linux) एक ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) है। लिनक्स ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर है यानी लिरिक्स का कोई भी व्यक्ति अपने काम के लिए निशुल्क इस्तेमाल कर सकता है यह अभी तक का सबसे कामयाब सॉफ्टवेयर माना जाता है आइए जानते हैं लिनक्स (linux) के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और जानकारियां - लिनक्स क्या है - What is linux in Hindi

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लिनक्स क्या है - What is Linux in Hindi 

लिनक्स का इतिहास (History of Linux)

लिनक्स (linux) यूनिक्स (UNIX) की तरह ही एक ऑपरेटिंग सिस्टम है तो पहले थोडा सा यूनिक्स (UNIX) के बारे में जान लेते हैं यूनिक्स (UNIX) को 1960 के दशक में AT&T कंपनी जो इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार के क्षेत्र में काम करती थी ने अपनी प्रयोगशाला जिसे बेल प्रयोगशाला (Bell Laboratories) में विकि‍सित किया, यूनिक्स (UNIX) पर एटी&टी का एकाधिकार था इसलिये इसे बेचा नहीं जा सकता था
बेल प्रयोगशाला (Bell Laboratories) 👇
बेल प्रयोगशाला (Bell Laboratories) को "एटी&टी बेल लैबोरेटरीज" के नाम से और "बेल टेलीफोन लैबोरेटरीज" के नाम से जाना जाता था, अरे ये वही प्रयोगशाला है जिसमें ऐलेक्ज़ैन्डर ग्राहम बेल (Alexander Graham Bell) ने दुनिया को पहला टेलीफोन दिया था, इस प्रयोगशाला में ही प्रारम्भिक प्रोग्रामिंग भाषा का भी विकास हुआ 
इसलिये यूनिक्स (UNIX) को कंपनी ने इसके मूल सोर्स कोड (Source Code) के साथ सरकार और विश्वविद्यालयों को दे दिया साथ में यह भी कहा कि वह चाहें तो इसके बदलाव कर सकते हैं 
सोर्स कोड (source code) क्‍या है ?
उच्च स्तरीय कंप्यूटर भाषाएँ जैसे सी++, जावा में लिखे प्रोग्राम को सोर्स कोड कहा जाता है
यूनिक्स (UNIX) के दशक तक यूनिक एक बहुत ही पावरफुल ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में उभर कर आया, यूनिक्स में लगातार बदलाव और विकास होता रहा क्योंकि यूनिक्स के सोर्स कोड (Source Code) में बदलाव किया जा सकता था और इसके सोर्स कोड का भी उपयोग किया जा सकता था, लेकिन यूनिक्स में इसको समझना तथा चलाना मुश्किल था, इसको सरल बनाने के लिये कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर एंड्रयू टेनेनबाम (Andrew S. Tanenbaum) ने 1987 में यूनिक्स (UNIX) के उपयोग से एक ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्‍टम बनाया गया जिसका नाम था मिनिक्स (MINIX) MINIX यानि Mini - UNIX लेकिन इसमें भी कुछ कमियां बाकी रह गयीं

लिनुस टोरवाल्ड (Linus Torvalds) ने मिनिक्स (MINIX) की कमियों को दूर किया और असेम्बली भाषा में एक प्रोग्राम लिखा जिसे नाम दिया गया ‘लिनूस का यूनिक्स’ जो बाद में लिनक्स (linux) के नाम से जाना गया लिनक्स (linux) पहला कोर या कर्नेल (kernel) 1991 में पहली बार लाइनेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम लोगों के सामने आया हालांकि इसे यूनिक्स के उपयोग से ही बनाया गया था लेकिन फिर भी से यूनिक्स नहीं कहा जा सकता था क्योंकि यूनिक्स (UNIX) AT&T कंपनी का रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क उत्पाद है और लिनक्स (linux) को बिल्कुल फ्री सॉफ्टवेयर के रूप में बनाया गया था 
कर्नेल (kernel) क्या होता है ? 
कर्नेल (kernel) कंप्यूटर का एक प्रोग्राम होता है जो ऑपरेटिंग सिस्टम पर पूरा कंट्रोल रखता है कर्नेल (kernel) ऑपरेटिंग सिस्टम का ही एक हिस्सा है. जो कंप्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच में ब्रिज की तरह से काम करता है
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Thursday, December 21, 2017

December 21, 2017

प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक क्‍या है - What Is Programming Language Translator in Hindi

प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक ( Programming Language Translator ) ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो प्रोग्रमिंंग भाषाओं में लिखे गये प्रोग्रामों का अनुवाद बिना कोड को बदले कंप्‍यूटर की मशीनी भाषा ( Machine language ) में करते हैं आईये प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक ( Programming Language Translator ) बारे में और जानते हैं - 

प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक क्‍या है -  What Is Programming Language Translator in Hindi

प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक क्‍या है - What Is Programming Language Translator in Hindi - प्रोग्रामिंग लैंग्वेज ट्रांसलेटर

सबसे पहले समझते हैं मशीनी भाषा (Machine language )किसे कहते हैंं

मशीनी भाषा ( Machine language ) वह भाषा होती है जिसमें केवल 0 और 1 दो अंको का प्रयोग होता है यह कंप्‍यूटर की आधारभूूत भाषा होती है जिसे कंप्‍यूटर सीधे सीधे समझ लेता है, मशीनी भाषा बायनरी कोड में लिखी जाती है जिसके केवल दो अंक होते हैं 0 और 1 चूंकि कम्प्यूटर मात्र बाइनरी संकेत अर्थात 0 और 1 को ही समझता है और कंप्‍यूटर का सर्किट यानी परिपथ इन बायनरी कोड को पहचान लेता है और इसे विधुत संकेतो ( Electrical signals ) मे परिवर्तित कर लेता है इसमें 0 का मतलब low या Off है और 1 का मतलब High या On 

भाषा अनुवादक ( Language Translator ) की जरूरत क्‍यों होती है 

मशीनी भाषा ( Machine language ) के अतिरिक्‍त सभी प्रोग्रामिंग भाषा ( Programming Language ) में 0 और 1 के अलावा अन्‍य अंकाेें और शब्‍दोंं का प्रयोग होता है लेकिन कंप्‍यूटर सीधे इस पढ नहीं पाता है,  लेकिन भाषा अनुवादक ( Language Translator ) इन अंकों और शब्‍दों को मशीनी भाषा अथवा बायनरी अंकों में बदल देता है ताकि कंप्‍यूटर इस आसानी से पढ सके और प्रोग्राम के अनुसार काम कर सके 

प्रोग्राम अनुवादक के प्रकार ( Types of Program Translators ) 

प्रोग्रामिंग भाषा अनुवादक ( Programming Language Translator ) तीन प्रकार के होते हैं - 
  1. असेम्बलर ( Assembler )
  2. कम्पाइलर(Compiler) 
  3. इंटरप्रेटर (Interpreter)

सीधेे सीधे मशीनी भाषा में प्रोग्राम क्‍यों नहीं लिखे जाते हैं 

चूंकि मशीनी भाषा में किसी भी प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन है, अगर आपको मशीन भाषा में यानि बायनरी में लिखना हो - I LOVE MYBIGGUIDE.COM

तो आपको यह मशीनी भाषा ( Machine language ) में कुछ ऐसा लिखना होगा -

01001001 00100000 01001100 01001111 01010110 01000101 00100000 01001101 01011001 01000010 01001001 01000111 01000111 01010101 01001001 01000100 01000101 00101110 01000011 01001111 01001101 

आशा है आप समझ गये होगें :)

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