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Friday, April 20, 2018

April 20, 2018

कंट्रोल यूनिट (CU) क्या है - What is Control Unit in CPU

कंट्रोल यूनिट (Control Unit) सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट यानि CPU का एक मुख्‍य घटक होता है इसे नियंत्रण इकाई भ्‍ाी कहते हैं शार्ट में इसे CU भी कहा जाता है तो आईये जानते हैं कंट्रोल यूनिट (Control Unit) क्‍या है और यह सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट यानि CPU में क्‍या काम करती है - What is Control Unit in CPU

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कंट्रोल यूनिट क्या है - What is Control Unit in CPU in Hindi

आप तो जानते हैं कंप्‍यूटर कोई भी काम करने के लिये प्रोसेंसिग करता है प्रोसेसिंग काम होने की प्रकिया को कहा जाता है जिसमें यूजर द्वारा इनपुट डाटा को सूचना में परिवर्तन किया जाता है प्रोसेसिंग की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है - 
  1. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है 
  2. कंप्यूटर में बूटिंग क्या होती है

प्रोसेसिंग क्या होता है -What is Processing

आपके द्वारा इनपुट डाटा की सभी प्रकार की गणना और तुलना अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) में होती हैं प्रोसेसिंग से पहले प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा होता है और जो निर्देश होते हैं वह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट में ट्रांसफर हो जाते हैं और वहां पर उनकी प्रोसेसिंग का कार्य होता है Arithmetic logic unit (ALU) से जो परिणाम मिलते हैं उनको प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर कर दिया जाता है और प्रोसेसिंग समाप्त होने के बाद में प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा बचता है या अंतिम परिणाम बचते हैं वह एक आउटपुट डिवाइस (Output device) के माध्यम से आप तक पहुंचा दिए जाते हैं

कैसे और क्‍या काम करता है कंट्रोल यूनिट

इस सारी प्रोसेसिंग की प्रक्रिया को कंट्रोल करता है कंट्रोल यूनिट यानी इनपुट डिवाइस को डाटा कहां से लेना है उसको स्टोरेज डिवाइस में कब डालना है एलयू को एक बार डेटा कब लेना है और डेटा का क्या करना है और अंतिम परिणाम को आउटपुट डिवाइस तक कैसे भेजना है यह सारे काम कंप्यूटर सिस्टम के कंट्रोल यूनिट (CU) से ही संभव होते हैं वह प्रोग्राम निर्देशों को सेलेक्ट करता है उनका समझता है तथा कंट्रोल यूनिट पूरी सिस्टम की कार्यप्रणाली को निर्देशित करने का काम करता है और प्रोग्राम का पालन करने में सक्षम होता है

यानी सोचने का काम करता है अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट और प्रोग्रामर द्वारा सभी प्रोग्राम्स में जो निर्देश दिए जाते हैं , उन सभी निर्देशों का पालन कराने का काम करता है कंट्रोल यूनिट, कंट्रोल यूनिट मेन मेमोरी में स्‍टोर किए गए सारे प्रोग्राम से निर्देशों को प्राप्त करता है उन निर्देशों का अर्थ करता है और उनको इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स में कंवर्ट कर देता है जो सिस्टम के अन्य यूनिट को उनके कार्यों को करने के लिए सक्रिय करता है 

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Thursday, April 19, 2018

April 19, 2018

अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) क्‍या है - What is Arithmetic logic unit (ALU) in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं प्रोसेसर (Processor) को कंप्यूटर का दिमाग कहा जाता है जैसे हमारा दिमाग सोचने समझने का काम करता है उसी प्रकार से प्रोसेसर भी सोचने और समझने का काम करता है लेकिन उसके लिए उसे जरूरत होती है (ए. एल.यु.) की यानी अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit) की तो आइए जानते हैं क्या है यह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU) और यह किस प्रकार काम करती है - What is Arithmetic logic unit in Hindi

अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) क्‍या है - What is Arithmetic logic unit (ALU) in Hindi

अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) क्‍या है - What is Arithmetic logic unit (ALU) in Hindi

अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic logic unit) सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के मुख्य तीन घटकों में से एक है जिसमें मेमोरी यूनिट (Memory unit) और कंट्रोल यूनिट (Control unit) भी शामिल है ALU कंप्यूटर हार्डवेयर में एक डिजिटल सर्किट होता है, अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट का मुख्य कार्य होता है अंकगणितीय तर्क इकाई अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट का मुख्य कार्य होता है अंकगणितीय कार्य करना जैसे जोड़ना घटाना गुणा करना भाग करना और गणित की तरह और भी जितने कार्य होते हैं वह करना इसके अलावा तर्क संबंधित कार्य जितने भी होते हैं जैसे तुलना करना चयन करना मिलान करना डाटा को आपस में मर्ज करना इस प्रकार की कार्य अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU)  करती है एएलयू को मुख्य रूप से बेसिक अर्थमेटिक ऑपरेशन के लिए ही डिजाइन किया गया है -

  1. हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना
  2. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है 
  3. कंप्यूटर में बूटिंग क्या होती है

अर्थमेटिक ऑपरेशन (Arithmetic operation)

  • + Add (जोडना)
  • - Subtract (घटाना)
  • x Multiply (गुणा करना)
  • / Divide ( भाग देना)

लॉजिक ऑपरेशन (logic operation)

  • < Less then (छाेटा है) 
  • = equal to (बराबर है) 
  • > Greater then (बडा है)
यह सभी प्रकार की गणना और तुलना अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) में होती हैं प्रोसेसिंग से पहले प्राइमरी मेमोरी (Primary memory में जो डाटा होता है और जो निर्देश होते हैं वह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट में ट्रांसफर हो जाते हैं और वहां पर उनकी प्रोसेसिंग का कार्य होता है Arithmetic logic unit (ALU) से जो परिणाम मिलते हैं उनको प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर कर दिया जाता है और प्रोसेसिंग समाप्त होने के बाद में प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा बचता है या अंतिम परिणाम बचते हैं वह एक आउटपुट डिवाइस (Output device) के माध्यम से आप तक पहुंचा दिए जाते हैं

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Monday, April 16, 2018

April 16, 2018

हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना - Physical Structure Of Hard Disk in Hindi

हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) होती है इसका प्रयोग बड़े पैमाने पर डाटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है और तेज गति से दोबारा से प्राप्त किया जा सकता है आईये जानते हैं हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना - Physical Structure Of Hard Disk in Hindi 

हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना - Physical Structure Of Hard Disk in Hindi

हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना - Physical Structure Of Hard Disk in Hindi


असल में हार्ड डिस्क कई सारी प्‍लैटरों को मिलाकर एक एयरटाइट केस में एक के ऊपर एक लगाकर यानी डिस्‍क का ढेर बनाकर एक हार्ड डिस्क का निर्माण किया जाता है प्रत्येक प्‍लैटर एक पतली गोलाकार धातु प्लेट का बना होता है जिसके दोनों ओर मैग्नेटिक लेयर होती है यानी मैग्नेटिक पदार्थ की कोटिंग होती है आजकल जितने भी प्लैटर होते हैं वह 3.5 इंच डायमीटर के होते हैं

मान लीजिए एक कंप्यूटर जिसमें 80 GB या उससे अधिक क्षमता की हार्ड डिस्क का प्रयोग होता है उसमें 7 या अधिक डिस्क एक केंद्रीय शाफ्ट पर लगी होती हैं जो लगभग 2400 से 7200 आरपीएम यानी चक्कर प्रति मिनट की स्पीड से घूमती हैं यह प्‍लैटर एक दूसरे से 1.5 इंच की दूरी पर लगे होते हैं प्रत्येक प्‍लैटर के ऊपर और नीचे रीड और राइट हेड दिया गया होता है जो एक मूबेबल आर्म के साथ जुड़ा होता है दो प्‍लेटर के बीच लगे आर्म दो रीड और राइट हैड लेकर चलते हैं, अत एक 6 प्‍लेटर वाली हार्डडिस्‍क को 12 हेड वाली डिस्‍क भी कहा जा सकता है
हार्ड डिस्क में जितनी भी डिस्क होती हैं वह समान गति पर घूमती हैं व समान दिशा में घूमती हैं आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हार्ड डिस्क की सबसे ऊपरी सतह और सबसे निचली सतह पर डाटा स्टोर नहीं होता है बाकी जितनी में डिस्क होती हैं उन सभी सतह  पर डाटा स्टोर किया जा सकता है प्रत्येक डिस्क में कई सारे अदृश्य व्रत होते हैं जिन्हें ट्रैक कहा जाता है इन ट्रैकों को एक नंबर दिया जाता है सबसे बाहरी ट्रक का जो नंबर होता है वह जीरो होता है अब हर डिस्क पर यह ट्रैक दिए गए होते हैं और एक ही नंबर वाले सभी ट्रैक एक सिलेंडर का निर्माण करते हैं  इस प्रकार एक हार्डडिस्‍क में जिसमें 10 प्‍लैटर होते हैं और 18 रिकार्डिग सतहेंं होती हैं क्योंकि हार्ड डिस्क की सबसे ऊपरी सतह और सबसे निचली सतह पर डाटा स्टोर नहीं होता है इसलिये वह 18 ही होती हैं और इस तरह सिलेंडर में 18 ट्रैक होते हैं


लेटेंसी टाइम (Latency time) और सीक टाइम (seek time) 

अब समझ लेते हैं लेटेंसी टाइम और सीक टाइम क्या होता है एक डिस्‍क में निश्चित ट्रैक पर पहुंचने में लगने वाले समय को लेटेंसी टाइम (Latency time) कहा जाता है और रिकॉर्ड को पढ़ने में अलने वाले समय को सीक टाइम (seek time) कहा जाता है लेटेंसी टाइम (Latency time) और सीक टाइम (seek time) दोनों मिलाकर कुल समय एक हार्डडिस्‍क का एक्सेस टाइम (Access time) को बोला जाता है

अब जान लेते हैं हार्ड डिस्क में डाटा को कैसे व्यवस्थित रखा जाता है डाटा को व्यवस्थित रखने के लिए डॉस मेमोरी डिस्क को दो भागों में बांटती है पहला सिस्टम एरिया और दूसरा डाटा एरिया
1- सिस्टम एरिया (System Area)
सिस्टम एरिया हार्ड डिस्क का कुल 2% होता है जो डिस्क की मूल संरचना को संगठित करने के लिए प्रयोग किया जाता है सिस्टम एरिया तीन भागों में बटा होता है -
  1. बूट रिकोर्ड्स(Boot Records)
  2. फैट(FAT)
  3. रूट डायरेक्टरी (Root Directory)

1- बूट रिकोर्ड्स (Boot Records)

बूट रिकोर्ड्स (Boot Records) को पार्टीशन सेक्टर भी कहा जाता है एक सेक्टर का आकार 512 बाइट का होता है जिसके पहले सेक्टर का उपयोग किया जाता है इन बूट्स एक्टर्स में निम्नलिखित जानकारी होती है जैसे डिस्क का प्राइमरी पार्टीशन टेबल कहां रखना है कंप्यूटर स्टार्ट करने की प्रक्रिया के लिए आवश्यक कोड और निर्देश की जानकारी आदि रहती है 

2- फैट(FAT)

फैट(FAT) की फुल फॉर्म है फाइल एलोकेशन टेबल जिसे संक्षेप में फैट कहा जाता है फैट(FAT) टेबल बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसमें डाटा का पूरा रिकॉर्ड रहता है कि वह कहां पर स्टोर किया जाना है

3- रूट डायरेक्टरी (Root Directory)

कंप्यूटर के फाइल सिस्टम के डायरेक्टरी संखला की पहली डायरेक्टरी रूट डायरेक्टरी (Root Directory) होती है इसे मूल डायरेक्टरी के नाम से भी जानते हैं इसी में सभी अन्य फाइल है डायरेक्टरी और सब डायरेक्टरी का हिसाब-किताब रहता है

2- डाटा एरिया (Data Area)

2% हिस्सा सिस्टम एरिया कवर करता है तो 98% प्रतिशत हिस्सा डाटा एरिया (Data Area) कवर करता है हमारे द्वारा बनाई गई सभी प्रकार की फाइलें और डाटा इसी डाटा एरिया में तो रहता है यह पूरा डिटेल या छोटे-छोटे क्लस्टर में विभाजित रहता है