Technovedant Chapter 2

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Thursday, February 18, 2021

February 18, 2021

यू.एस.बी 2.0 और यू.एस.बी 3.0 में क्‍या अंतर हैं

अगर आप कंप्‍यूटर, लैपटॉप या मोबाइल इस्‍तेमाल करते हैं तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि आपने यू.एस.बी शब्द‍ न सुना हो, यूएसबी ने हमारे जीवन को बहुत आसान बना दिया हैं चाहे Data Transfer करना हो या कोई हार्डवेयर कंप्‍यूटर के साथ जोडना हो या फिर मोबाइल फोन को चार्जर से कनेक्‍ट करना हो सभी जगह यूएसबी का इस्‍तेमाल किया जा रहा हैं जिस तरह यूएसबी ने हमारे जीवन में बदलाव किए हैं उसी तरह यूएसबी के वर्जन 2.0 की सफलता के बाद वर्जन 3.0 आ चुका हैं यहां हम जानने वाले है यूएसबी 2.0 और 3.0 के बारे में तो अगर आप भी रूचि रखते है तो यह आर्टिकल पूरा पढिये

सबसे पहले जानें क्‍या है यूएसबी

USB की Full Form Universal Serial Bus हैं जिसका उपयोग Industry Standard के रूप में किया जा रहा हैं जहां अधिकतर Data Transfer के लिए यूएसबी का इस्‍तेमाल किया जाता हैं आज वर्तमान में यूएसबी का प्रयोग हर हार्डवेयर उपकरण के साथ किया जा रहा हैं जैसे Pan drive, Hard Disk Drive, Keyboard, Mouse, Mobile Charging Port. etc. यूएसबी के बहुत सारे फायदे हैं जिसमें से दो मुख्‍य बडे फायदे हैं पहला यूएसबी की भौतिक संरचना और दूसरा Data Transfer गति आप कभी भी कहीं भी यूएसबी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं

ज्ञान बटोरें 👇

अब जानें कहां से आया और किसने सोचा  

यूएसबी की परिकल्‍पना 1996 में की गयी थी जिसे यूएसबी 1.X नाम दिया गया था जिसकी Data Transfer स्‍पीड 1.5 Mbps थी इसके बाद 1998 में यूएसबी 1.1 को Release किया गया यूएसबी 1.1 माइक्रोसॉफ्ट द्वारा Design किया गया था इसके बाद यूएसबी 2.0 को वर्ष 2000 में Launch किया गया था, इसे Intel और अन्‍य कंपनियों ने मिलकर बनाया था जिसकी अधिकतम Data Transfer स्‍पीड 480 Mbps थी जो यूएसबी 1.1 से बहुत अधिक थी, यह यूएसबी 2.0 अपने Data Transfer स्‍पीड की वजह से ज्‍यादा Popular हो गयी और ज्यादातर Device में इसका उपयोग होने लगा इसी क्रम में वर्ष 2008 में यूएसबी 3.0 को Launch किया गया जिसकी अधिकतम Data Transfer स्‍पीड 5Gbps है यूएसबी 3.0 को सुपर स्‍पीड का भी नाम दिया गया है

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भला USB कैसे करता है काम 

USB में चार तार केबल इंटरफेंस का इस्‍तेमाल किया जाता है,दो तारों का प्रयोग डाटा भेजने या डाटा Receive करने के लिए किया जाता हैं,और बाकी दो का उपयोग पॉवर सप्‍लाई के लिए किया जाता हैं, USB 2.0 केबल की लंबाई अधिकतम 5 मीटर तक हो सकती हैं, USB के लिए चार डाटा Transfer मोड हैं, Control Transfer का कार्य डिवाइस को कॉन्फिगर करना और स्‍टेटस की जानकारी पढना हैं

1- Bulk Transfer Mode

इसका इस्‍तेमाल भारी मात्रा में डाटा देने और तीन चरणों को लागू करने के लिए किया जाता है - 
  1. टोकन पैकेट
  2. डाटा पैकेट
  3. हैडशैक पैकेट

2- Data Bulk Transfer 

Host और End Point Device के बीच में होता है इस Transfer प्रक्रिया में Error खोजने के लिए Hardware Error Detection का उपयोग किया जाता है 

3- Isochronous Transfer Mode

इस मोड का प्रयोग Real Time में Data Transfer करने के लिए किया जाता है इसका इस्‍तेमाल ऑडियो और वीडियो डाटा को वास्‍तविक समय में एक Constant Rate पर भेजने के लिए इस्‍तेमाल होता है

4 - Interrupt Transfer Mode

इस मोड में पहले तीनों चरणों को शामिल किया जाता है और Data Transfer किया जाता है इस Transfer मोड का इस्‍तेमाल Mouse, Keyboard जैसे Devices को Use करने के लिए किया जाता है

यू.एस.बी 2.0 और यू.एस.बी 3.0 में क्‍या अंतर हैं

  1. Physical Structure - यूएसबी 2.0 और यूएसबी 3.0 की Physical Structure में कोई अंतर नहीं है दोनों डिवाइस के यूएसबी पोर्ट के अंदर ब्‍लैक ब्‍लॉग होता है
  2. Date Transfer Rate - एक तरफ जहां यूएसबी 2.0 की Data Transfer स्‍पीड 480 Mbps की होती है वही यूएसबी 3.0 की Data Transfer स्‍पीड 4800 Mbps की होती है जो लगभग यूएसबी 2.0 की स्‍पीड से 10 गुना ज्‍यादा है
  3. Types Of Communication - यूएसबी 2.0 कम्‍यूनिकेशन One Way होता है मतलब इसमें Host से End Point तक Data Transfer कर सकते है वही दूसरी ओर यूएसबी 3.0 कम्‍यूनिकेशन Two Way होता है
  4. Power Consumption - एक तरफ जहां यूएसबी 2.0 Power Consumption के मामले में खिफायती है जो 500mA वहीं दूसरी तरफ यूएसबी 3.0 की Power Consumption 900mA होती है
  5. Number of Wires - अगर वायरों की बात की जाए तो यूएसबी 2.0 में वायरों की संख्‍या 4 होती है वही दूसरी तरफ यूएसबी 3.0 में वायरों की संख्‍या 9 होती है
  6. Length of Cable - अगर केबल की लंबाई की बात करे यूएसबी 2.0 में केबल की लंबाई 5 मीटर होती है वही अगर यूएसबी 3.0 में बात करे तो 3 मीटर होती है
  7. Standard A Connector Color - अगर हम Standard Connector Color की बात करे तो यूएसबी 2.0 का रंग ग्रे होता है और अगर यूएसबी 3.0 की बात करे तो नीला होता है
  8. Standard B Connector - Standard B Connector यूएसबी 2.0 में छोटे आकार के होते है वही यूएसबी 3.0 में ये आकार में बडे होते है
  9. Signal Mechanism - यूएसबी 2.0 में Polling Mechanism होता है वही यूएसबी 3.0 में Asynchronous Mechanism होता है
  10. Cost - अगर कीमत की बात की जाए तो यूएसबी 3.0 की कीमत यूएसबी 2.0 से ज्‍यादा है

निष्‍कर्ष

आशा है आप समझ गए होगे कि यूएसबी क्‍या होता है,यूएसबी का इतिहास क्‍या है और यूएसबी 2.0 और यूएसबी 3.0 के बीच क्‍या क्‍या Difference होते है इसके अलावा यूएसबी कैसे कार्य करता है, अगर ये Article आपको पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्‍तों के सा‍थ जरूर शेयर करे और अगर आपके मन में कोई दुविधा हो तो हमें Comment करे

Wednesday, December 16, 2020

December 16, 2020

सर्वर क्‍या होता है कैसे काम करता है

प्राचीन समय में किसी सूचना को एक जगह से दूसरी जगह भेजने में कई घण्‍टे, सप्‍ताह, महीनों या फिर सालों लग जाते थे मगर आज सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश तक अपनी सूचनाओं को भेजने या प्राप्‍त करने में बहुत कम समय लगता है और यह सब संभव हुआ है इंटरनेट व सर्वर के माध्‍यम से तो आइए जानते हैं विस्‍तार से सर्वर के बारे में कि सर्वर क्‍यों आवश्‍यक है और क्‍या है इसकी उपयोगिता 



सर्वर क्‍या है (What Is Server)

सर्वर एक कम्‍प्‍यूटर होता है जो दूसरे कम्‍प्‍यूटर्स एवं उपभोगकर्ता को सेवा प्रदान करता है सर्वर एक ऐसा सिस्‍टम है जो सूचनाओं को स्‍टोर रखता है और जरूरत पडने पर सूचनाओं को इंटरनेट के माध्‍यम से आदान-प्रदान करने एवं डाटा को ट्रान्‍सफर करने में मदद करता है अक्‍सर हममें से बहुत से लोगों ने अक्‍सर सुना होगा एवं सभी यह जानते भी होंगे कि जब कोई व्‍यक्ति किसी बैंक में जाता है तो बैंक कर्मचारियों द्वारा कहा जाता है कि अभी आपका कार्य नहीं हो सकता जब बैंक कर्मचारी से कार्य न होने का कारण पूछा जाता है तो उनके द्वारा कहा जाता है कि अभी सर्वर डाउन है या काम नहीं कर रहा है जब सर्वर सुचारू रूप से कार्य करने लगेगा तब आपका काम हो जायेगा यानी पैसों का लेन-देन आप कर सकते हैं 

इसी प्रकार जब कोई विद्यार्थी अपना फार्म भरवाने के लिए साइबर कैफे जाता है तथा उसका फार्म नहीं भरा जाता है तो विद्यार्थी द्वारा पूछने पर कहा जाता है कि अभी सर्वर डाउन होने के कारण आपका फार्म नहीं भर सकता इसी प्रकार फेसबुक पर हमारे द्वारा बहुत सारे फोटो एवं यूटयूब वीडियो ओपन करने पर खुल जाते हैं तो ये सभी डाटा कहीं न कहीं स्‍टोर अवश्‍य होता होगा जो प्‍ले करने के तुरंत बाद ओपन हो जाता है और हम उसे आसानी से देख सकते हैं

सर्वर के कौन कौन से प्रकार हैं

परिस्थिति के अनुसार एक ही कार्य को करने के लिए अलग अलग सर्वर का इस्‍तेमाल किया जा सकता है या अलग-अलग कार्य करने के लिए अलग अलग सर्वर का भी इस्‍तेमाल किया जाता है तो आइये जानते हैं कि सर्वर कितने प्रकार के होते हैं

ई-मेल सर्वर (Email Server)

ईमेल पत्र भेजने का एक आधुनिक रूप है। यह लगभग हर जगह उपयोग किया जाता है आप भी जीमेल हॉटमेल जैसे ईमेल सर्विस का इस्‍तेमाल करते होगें हर रोज लाखों ईमेल भेजे जाते हैं और रिसिव किये जाते हैं लेकिन आपने देखा होगा ये सभी ईमेल आपके ईमेल अकाउन्‍ट पर सुरक्षित रखते हैं और कभी आप उन्‍हें खोल कर देख सकते हैं ई-मेल सर्वर मैसेज को भेजने और उसे प्राप्‍त करने में मदद करता है साथ ही स्‍टोरेज डाटा को सेव भी करके रखता है एवं उसमें बहुत स्‍पेस देने का काम भी करता है इसमें सभी मैसेज सेव रहते हैं

वेब सर्वर (Web server)

इण्‍टरनेट पर जितनी भी वेबसाइट हैं उन सभी का डाटा वेब सर्वर में स्‍टोर होता है इनके लिये होस्‍ट कंप्‍यूटर की आवश्‍यकता होती है इसके आपको थोडा सा होस्टिंग का ज्ञान लेना आवश्‍यक है 

वेब होस्टिंग क्या है - Web Hosting Kya Hai

मान लीजिए आप कोई बिजनेस करते हैं और आपको अपना बिजनेस का जो भी सामान है या माल है उसे रखने के लिए एक दुकान या स्‍टोर की आवश्यकता होती है इसी प्रकार अपनी वेबसाइट पर आप जो भी मेटेरियल रखते हैं जैसे Video, Photo या Text Article उन सभी को Internet पर रखने के लिए एक स्टोरेज की आवश्यकता होती है, अब एक कंम्‍पयूटर को इंटरनेट से जोडा जाता है और 24 घंटे ऑन रखा जाता है और उस पर आपकी यह सभी सामग्री स्‍टोर रहती है उसे Host Computer या Web Host कहते हैं और इस प्रक्रिया को Web Hosting कहते हैं

यानी जो कंप्‍यूटर वेब पेज स्‍टोर करता है उसे वेब सर्वर कहा जाता है वेब पेज अन्‍य व्‍यक्तियों को दिखने के लिए तभी उपलब्‍ध रहता है जब वह वेब सर्वर पर हो यानी वेब सर्वर एक कम्‍प्‍यूटर है जो वेबसाइट के डाटा को स्‍टोर रखता है यह एक कम्‍प्‍यूटर प्रोग्राम भी है जो वेब पेज वितरित भी करता है 

आईडेंटिटी सर्वर (Identity Server)

आईडेंटिटी सर्वर रजिस्‍टर्ड यूजर लॉगिन करने के लिए एवं उसे सुरक्षित करने के लिए होता है

एफ0टी0पी0 सर्वर (FTP Servers)

एफ0टी0पी0 सर्वर का इस्‍तेमाल एक कम्‍प्‍यूटर से दूसरे कम्‍प्‍यूटर के बीच फाइल ट्रान्‍सफर करने के लिए किया जाता है इसकी फुल फार्म फाइल ट्रांसफर प्रोटोकाल है एफ0टी0पी0 बहुत ही पुराना प्रोटोकाल है और इसका इस्‍तेमाल आज भी किया जा रहा है

टेलनेट सर्वर (Telnet Servers)

इस टेलनेट सर्वर के माध्‍यम से एक यूजर कमप्‍यूटर को लॉगइन कर काम बहुत आसानी से कर सकता है

प्रोक्‍सी सर्वर (Proxy Servers)

अक्‍सर प्रोक्‍सी सर्वर का प्रयोग एप्‍पीयरेंस प्राप्‍त करने के लिए, रिक्‍वारमेंट को फिल्‍टर करने के लिए तथा कनेक्‍शन को शेयर आउट करने के लिए किया जाता है

न्‍यूज सर्वर (News Servers)

News Servers का उपयोग News को शेयर तथा डिलीवर करने के लिए किया जाता है, क्‍योंकि इस तकनीक का प्रयोग विश्‍व लगभग सभी देशों में बहुत ज्‍यादा मात्रा में लोगों द्वारा किया जाता है

सर्वर डाउन होता कैसे है (How Does The Server Go Down)

सर्वर का एक मात्र कार्य चाही गई सूचनाओं को उपलब्‍ध कराना होता है जब वह सूचनायें उपलब्‍ध नहीं करा पाता तो उसके द्वारा सूचना उस समय उपलब्‍ध न होना सर्वर डाउन कहलाता है इसका मतलब कि आप किसी कार्य के लिए किसी वेब साइट पर अनुरोध कर रहे हैं तथा वह नहीं हो पा रहा है ऐसी स्थिति में वेबसाइट पर Servers Not Found लिखा आता है इसके अतिरिक्‍त सर्वर डाउन होने के और भी कारण हो सकते हैं जैसे Network Problems, Power Failures, Application Crash आदि

सर्वर काम कैसे करता है (How Does The Server Work)

सर्वर अपना काम किस प्रकार से करता है यह जानना बहुत ही सरल है लेकिन इसकी प्रोसेस बहुत ही कठिन है सर्वर किस प्रकार से कार्य करता है इसको हम एक उदाहरण के माध्‍यम से समझते हैं जैसे हमें किसी भी साइट को खोजने के लिए उस साइट का नाम टाइप करना होता है इसके तुरंत बाद वह ब्राउजर उस साइट को होस्‍ट करने वाले सर्वर से सम्‍पर्क करेगा तथा उस ब्राउजर पर वह वेबसाइट दिखने के लिए रिक्‍वेस्‍ट करेगा 

इसी प्रकार ब्राउजर आपके द्वारा डाले गये यूएलआर को तीन भागों में विभाजित कर देता है जिसका प्रथम भाग http होता है जिसे प्रोटोकाल कहा जाता है दूसरा भाग सर्वर नेम अथवा वेबसाइट का नाम होता है जिसे हम डोमेन के नाम से भी जानते हैं एवं तीसरा उस फाइल का नाम होता है जिसे आपके द्वारा ओपन किया गया है यह कोई पेज या फिर कोई पोस्‍ट भी हो सकती है इसके पश्‍चात ब्राउजर उस वेबसाइट की सारी इन्‍फार्मेशन को IP Address में चेंज कर देता है आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि प्रत्‍येक वेबसाइट का अपना अलग IP Address होता है जो सभी का अलग-अलग होता है 

यही कारण होता है कि आप जिस भी वेबसाइट पर जाना चाहते हैं उसी पर पहुंचते हैं इसके तुरंत बाद ब्राउजर और सर्वर एक दूसरे से कनेक्‍ट हो जाते हैं तथा आपको जो भी जानकारी प्राप्‍त करनी होती है उसे बिना देरी किये तुरंत उपलब्‍ध करा दिया जाता है

FTP Client को Servers से कैसे जोडते हैं

किसी भी इण्‍टरनेट वेबसाइट से डाटा को ट्रान्‍सफर करने के लिए FTP Client का इस्‍तेमाल किया जाता है इंटरनेट पर काफी मात्रा में फ्री में FTP Client सॉफ्टवेयर आसानी से प्राप्‍त हो जाते हैं सर्वर के IP Address के माध्‍यम से सर्वर से कनेक्‍शन करने के उपरान्‍त इसका उपयोग कर डाटा को बहुत आसानी से ट्रान्‍सफर कराया जा सकता है

मैं समझता हूं कि आप अच्‍छे से समझ गये होंगे कि सर्वर होता क्‍या है यह कितने प्रकार का होता है और यह किस प्रकार कार्य करता है

Saturday, May 30, 2020

May 30, 2020

मदरबोर्ड क्या है - What is Motherboard in Hindi

मदरबोर्ड क्या है (What is Motherboard in Hindi ) Computer में मदरबोर्ड क्यों आवश्यक है Motherboard क्या काम करता है या कहें तो मदरबोर्ड कैसे काम करता है अगर आप भी गूगल पर सर्च कर रहे हैं मदरबोर्ड क्या है? (What is Motherboard in Hindi) तो यहां हम जाने वाले हैं मदरबोर्ड के बारे में पूरी जानकारी और मदरबोर्ड के बारे में  बहुत से महत्वपूर्ण तथ्य, जब भी कंप्यूटर की बात होती है तो कहीं ना कहीं मदरबोर्ड का नाम जरूर आता है

अगर आपने भी कभी अपना सीपीयू कैबिनेट के अंदर देखा होगा तो उसमें नीचे आपको एक चौकोर बोर्ड दिखाई दिया गया होगा जिसमें आपकी हार्ड डिस्क, रैम, प्रोसेसर, इसके अलावा आपका कीबोर्डमाउस मॉनिटर, स्पीकर या अगर आप प्रिंटर भी कनेक्ट करते हैं या फिर आप कोई स्केनर अपने कंप्यूटर के साथ में जोड़ना चाहते हैं तो उसे भी आप अपने मदरबोर्ड से ही कनेक्ट करते हैं इसलिए मदरबोर्ड कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है चलिए अब जानते हैं


क्या होता है मदरबोर्ड - What is in Motherboard Hindi 

प्रिन्टेड सर्किट बोर्ड Printed Circuit Board (PCB) 

मदर बोर्ड एक इलेक्ट्रिक बोर्ड या Printed Circuit Board (PCB) होता होता है जैसे आपके घर में एक बिजली का बोर्ड लेकिन बिजली के बोर्ड की वायरिंग आपको दिखाई देती है क्योंकि उसमें हर बटन और स्विच को अलग-अलग तार के माध्यम से एक से दूसरे के साथ में जोड़ा जाता है वही मदरबोर्ड में यह जो तारों की वायरिंग होती है उसे प्रिंट किया जाता है यानी मदर बोर्ड का जो पूरा सर्किट होता है वह प्रिंटेड होता है जिसमें सभी तरह के कनेक्शन को प्रिंट किया जाता है इसलिए इसे मुद्रित परिपथ बोर्ड या प्रिन्टेड सर्किट बोर्ड या पीसीबी भी कहते हैं इसके अलावा मदर बोर्ड को मेन बोर्ड या सिस्टम बोर्ड भी कहा जाता है

प्रिन्टेड सर्किट बोर्ड Printed Circuit Board (PCB)

ऐसा नहीं है कि मदरबोर्ड का प्रयोग सिर्फ आपके कंप्यूटर में ही किया जाता है मदर बोर्ड का प्रयोग आज के समय में ढेर सारे इलेक्ट्रिक उपकरणों में इसके अलावा रोबोटिक्स में भी किया जाता है इसकी संरचना इस प्रकार की जाती है कि यह आपके सभी प्रकार के डिवाइस को एक साथ में जोड़ता है और उन सभी के बीच में  संपर्क स्थापित करता है
आप बिना मदरबोर्ड के अपने कंप्यूटर की कल्पना नहीं कर सकते हैं अगर मदरबोर्ड कंप्यूटर में नहीं लगा होगा तो आप एक प्रोसेसर एक रैम और हार्ड डिस्क को एक साथ में कनेक्ट नहीं कर पाएंगे यह सभी डिवाइस मदरबोर्ड के माध्यम से ही एक साथ सामान्य जिस स्थापित कर पाती हैं और ठीक प्रकार से कार्य कर पाती हैं जरा सोच कर देखिए कि अगर मदरबोर्ड ना हो तो आप अपने कीबोर्ड माउस  को अपने कंप्यूटर के साथ कैसे कनेक्ट कर पाएंगे

मदरबोर्ड के पार्ट्स - Motherboard Parts in Hindi 

प्रोसेसर सॉकेट (CPU socket)

मदर बोर्ड के प्रोसेसर पॉकेट में प्रोसेसर को फिट किया जाता है इसके साथ में आप प्रोसेसर को ठंडा रखने के लिए कैन वी कनेक्ट कर पाते हैं जिसके लिए मदर बोर्ड में पहले से चार होल रहते हैं जिससे प्रोसेसर के साथ में आसानी से उसके फैन को भी कनेक्ट किया जा सके उसके लिए पावर का अलग से एक सॉकेट भी दिया गया होता है

पावर कनेक्टर (Power connector)

पावर कनेक्टर की सहायता से मदरबोर्ड को पावर दी जाती है जिससे वह पावर आगे सीपीयू तक और अन्य उपकरणों तक पहुंचाई जाती है यह पावर मदरबोर्ड को पावर सप्लाई के माध्यम से दी जाती है  मदर बोर्ड के किस हिस्से को कितनी पावर देनी है इसे इसी तरह से डिजाइन किया जाता है

मेमोरी स्लॉट (Memory Card Slot)

मेमोरी स्लॉट मदरबोर्ड का वह हिस्सा होता है जहां पर आप रैम को इंस्टॉल करते हैं रैम आपके कंप्यूटर का बहुत महत्वपूर्ण भाग है मदर बोर्ड में इसके लिए कम से कम 2 स्लॉट दी गई होती हैं किसी किसी मदरबोर्ड में यह स्लॉट ज्यादा भी होते हैं

वीडियो कार्ड स्लॉट (Video Card Slot)

वीडियो कार्ड स्लॉट रैम से अलग प्रकार के होते हैं इसमें वीडियो कार्ड या ग्राफिक कार्ड इंस्टॉल किया जाता है वैसे तो आजकल मदर बोर्ड में ग्राफिक कार्ड इनबिल्ट ही होता है यानी आपको अलग से लगाने की आवश्यकता नहीं है लेकिन अगर आप कोई ऐसा सॉफ्टवेयर प्रयोग कर रहे हैं जिसमें अलग से ग्राफिक कार्ड लगाने की आवश्यकता है तो उसके लिए आप एक ग्राफिक कार्ड खरीद कर अपने मदरबोर्ड में अलग से फिक्स कर सकते हैं

CMOS बैटरी

CMOS battery in Hindi, मदर बोर्ड में CMOS बैटरी या सेल
मदर बोर्ड में CMOS बैटरी या सेल लगाने के लिए भी एक स्‍लॉट दिया गया होता है बहुत कम लोग जानते हैं कि आपके कंप्यूटर की घड़ी और मदरबोर्ड की जरूरी सेटिंग्स को सेव करने के लिए यह सेल बहुत आवश्यक है अगर यह सैलाब के मदरबोर्ड में नहीं होगा तो आप ना तो अपने कंप्यूटर की घड़ी को ठीक से चला पाएंगे क्योंकि जैसे ही कंप्यूटर बंद होगा वैसे ही आपके कंप्यूटर की घड़ी रीसेट हो जाएगी कंप्यूटर के बंद होने के बाद भी यही सेल आपकी घड़ी को कंटिन्यू चलाता रहता है साथ में आपके मदरबोर्ड की कुछ सेटिंग्स जिन्हें आप सेव करते हैं उनको भी सुरक्षित रखता है

ईथरनेट पोर्ट (Ethernet Port)

इथरनेट पोर्ट मदर बोर्ड का वही सा है जहां से आप अपने इंटरनेट केबल को मदरबोर्ड से कनेक्ट करते हैं पिछले समय में मदरबोर्ड के साथ में एक मॉडेम (modem) को इंस्टॉल करना होता था जिसके बाद ही आप कंप्यूटर में इंटरनेट प्रयोग कर पाते थे लेकिन अब Ethernet Port मदरबोर्ड में इनबिल्ट आता है जिसमें आप सीधे इंटरनेट केबल को लगाकर इंटरनेट प्रयोग कर सकते हैं

कीबोर्ड और माउस पोर्ट (PS/2 port/USB)

कीबोर्ड माउस पोर्ट मैं आपके कीबोर्ड और माउस को कनेक्ट किया जाता है इसमें दो तरह के पूर्व दिए गए होते हैं  पहला PS2 यानी Personal System/2 port  और दूसरा यूएसबी यानी यूनिवर्सल सीरियल बस कीबोर्ड और माउस वर्तमान में यूएसबी पोर्ट वाले ज्यादातर उपलब्ध होते हैं लेकिन अभी भी मदर बोर्ड के साथ में PS2 पोर्ट को दिया जाता है

VGA Port या VGA connector

वीजीए पोर्ट या विजय कनेक्टर में आपके कंप्यूटर के मॉनिटर को कनेक्ट किया जाता है VGA वीजीए का फुल फॉर्म होता है Video Graphics Array इस नीले रंग के कनेक्टर में 3 रॉ में 15  पिन वाला कनेक्टर फिट किया जाता है यह होता है  वैसे आजकल वीजीए के लिए HDMI और Display Port का भी प्रयोग किया जाने लगा है

मदरबोर्ड चिपसेट क्या होता है (Motherboard Chipset in Hindi)

यह तो आप जानते हैं कि मदरबोर्ड के अंदर ढेर सारे कंपोनेंट्स लगे रहते हैं जो कि इंटीग्रेटेड सर्किट के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े रहते हैं इस सभी के सेट को चिपसेट कहा जाता है चिपसेट के माध्यम से प्रोसेसर मेमोरी और अन्य डिवाइस के बीच में डाटा का कम्युनिकेशन होता है या सीधे शब्दों में कहें तो डेटा फ्लो (Data-flow ) होता है चिपसेट का डिजाइन माइक्रोप्रोसेसर के अनुकूल तैयार किया जाता है जिससे माइक्रोप्रोसेसर इनपुट और आउटपुट डिवाइसेज और मेमोरी के साथ में अपना कम्युनिकेशन और कंट्रोल स्थापित कर पाता है

विश्व में इंटेल एक लोकप्रिय चिपसेट बनाने वाली कंपनी है जो अपने मदर बोर्ड के लिए खुद के चिपसेट बनाती है अन्य मदरबोर्ड कंपनियों की बात करें तो वह दूसरों से चिपसेट खरीद कर अपनी मदरबोर्ड पर लगाते हैं इसीलिए मदरबोर्ड की कंपनी अलग और चिपसेट की कंपनी अलग आती है या ड्राइवर अलग हो सकते हैं 

नॉर्थ ब्रिज और साउथ ब्रिज क्या होता है - What is North Bridge and South Bridge in Hindi


नॉर्थ ब्रिज क्‍या होता है - What is North Bridge in Hindi

नॉर्थ ब्रिज मदरबोर्ड का ही एक भाग होता है Integrated BGA Chip होता है इस चिप के अंदर बहुत सारे कंट्रोलर होते हैं इस सर्किट का मुख्य काम मदरबोर्ड के साउथ ब्रिज से  डाटा को सीपीयू तक पहुंचाना और सीपीयू के द्वारा कैलकुलेट या प्रोसेस किए गए डेटा को साउथब्रिज तक पहुंचाना होता है नॉर्थ ब्रिज सीपीयू के बिल्कुल नजदीक लगा होता है अगर आप ध्यान से देखेंगे तो इस चिप के ऊपर एलुमिनियम की हीटसिंक लगी होती है
अगर यह खराब हो जाए तो

  • आप का मदरबोर्ड नो डिस्पले दर्शा सकता है 
  • साथ ही कंप्यूटर में ग्राफिक्स की भी प्रॉब्लम हो सकती है

साउथ ब्रिज क्या होता है - What is South Bridge in Hindi 

साउथ ब्रिज भी एक  Integrated BGA Chip होता है इसके अंदर इनपुट और आउटपुट डिवाइसेज के कंट्रोलर होते हैं जैसे हार्ड डिस्क कंट्रोलर यूएसबी कंट्रोलर पीसीआई कंट्रोलर यानी आपके मदरबोर्ड पर जितने भी इनपुट आउटपुट स्लॉट एयरपोर्ट होते हैं वह सभी के कंट्रोलर इस चिप के अंदर होते हैं
अगर यह चिप खराब हो जाए तो -
  • आपका मदरबोर्ड  खराब हो सकता है 
  • पावर सप्लाई  ठीक से काम नहीं कर सकती 
  • हार्ड ड्राइव डिस्कनेक्ट हो सकती है 
  • यूएसबी पोर्ट ठीक से काम नहीं करती 
  • कंप्यूटर का डेट एंड टाइम भी ठीक से वर्क नहीं करता है 
  • कंप्यूटर बार-बार  री स्टार्ट होता है

बायोस क्‍या होता है - What is bios in Hindi 

मदरबोर्ड में (CMOS) यानि Complementary metal oxide semiconductor नाम की चिप में BIOS की सेटिंग्‍स स्‍टोर रहती हैं, जब आप यह Settings बदलते हैं तो मदरबोर्ड में लगा सेल इन Settings को सुरक्षित रखता है, इन Settings में आपके कंप्‍यूटर का Time and date भी शामिल है, यदि कभी बायोस (BIOS) की Settings गडबड हो जायें तो -
  • बैटरी निकाल के फिर सें लगा देने से सेटिंग डिफ़ॉल्ट (Default settings) हो जाती हैं।
आशा है आप समझ गए होंगे मदरबोर्ड कंप्यूटर के लिए कितना जरूरी होता है और इसका नाम मदरबोर्ड क्यों रखा गया क्योंकि अगर मदरबोर्ड नहीं होगा तो कंप्यूटर की कल्पना नहीं की जा सकती है यह मदरबोर्ड के सभी भागों को आपस में जोड़ कर रखता है और उनमें आपस में कम्युनिकेशन भी स्थापित करता है

Friday, July 12, 2019

July 12, 2019

यूपीएस क्या है - What is UPS in Hindi

UPS क्या है और कैसे काम करता है Computer में UPS का उपयोग क्‍यों किया जाता है UPS की Full Form क्‍या होती है और यूपीएस और इन्वर्टर में क्या अंतर है, ऑफलाइन UPS या ऑनलाइन UPS किसेे कहतेे हैं, अगर आपके मन में यही सब प्रश्‍न हैं तो यहांं आपको मिलने वाली है यूपीएस के बारे में पूरी जानकारी - यूपीएस क्या है - What is UPS in Hindi

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यूपीएस क्या है - What is UPS in Hindi

जब आप कोई कंप्यूटर खरीदने जाते हैं तो पूरा कंप्यूटर खरीदने के बाद आपको यूपीएस खरीदने के लिए भी कहा जाता है और वह इसलिए कहा जाता है ताकि आपका कंप्यूटर खराब ना हो जाए अब कंप्यूटर बगैर यूपीएससी खराब कैसे होगा थोड़ा इसे समझ लेते हैं वैसे तो यह आपके घर की और मशीनों की तरह ही है जो कि बिजली से चलती हैं लेकिन उन सभी मशीनों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति (Untripped Power Supply) की जरूरत नहीं होती है यानी लाइट जाने पर उनको कोई भी खतरा नहीं होता है

जबकि कंप्यूटर एक ऐसी मशीन है अगर इसे प्रॉपर तरीके से बंद ना किया जाए यानी शटडाउन न किया जाए तो पहली चीज तो आपका जो डाटा है वह करप्ट हो सकता है आप की हार्ड डिस्क खराब हो सकती है या और भी कोई नुकसान हो सकता है तो कंप्यूटर को चलने के लिए Untripped Power Supply की जरूरत होती है जो इसे यूपीएस से मिलती है

full form of ups यूपीएस की फुल फॉर्म क्या होता है ?

full form of ups यूपीएस की फुल फॉर्म होती है Uninterruptible Power Supply यानि अबाधित विद्युत आपूर्ति आपकी रोजाना काम के दौरान अनेकों बार Power Cut होता है और इस पावर कट से आपके कंप्यूटर को नुकसान ना पहुंचे इसलिए उसको निर्बाध विद्युत आपूर्ति की जरूरत होती है और यह विद्युत आपूर्ति प्रदान करता है आपका यूपीएस ये कंप्यूटर डिवाइस को सुरक्षित रखता है डाटा लॉस से बचाता है

अगर बात करें लैपटॉप की तो उसमें भी जो बैटरी होती है वह भी यही काम करती है उसमें भी इनबिल्ट यूपीएस सिस्टम होता है यूपीएस आपकी कंप्यूटर सिस्टम को निरंतर पावर सप्लाई देता रहता है बिना किसी कट के इसमें लगी छोटी सी बैटरी ज्यादा लंबे समय तक तो आपके कंप्यूटर को चला नहीं सकती है लेकिन बैटरी आपको उतने समय तक का बैकअप जरूर देती है जितने समय में आप अपने कंप्यूटर को लाइट जाने के बाद प्रॉपर तरीके से शटडाउन कर सके और यूपीएस का यही काम होता है कि लाइट जाने के बाद आपका कंप्यूटर सीधे बंद ना हो


यूपीएस का आविष्कार किसने किया

यूपीएस का आविष्कार John J. Hanley ने किया था पहला यूपीएस 1932 में बना था

UPS कैसे काम करता है

यूपीएस के अंदर चार प्रमुख चीजें होती हैं सबसे पहली एक Rechargeable Battery होती है और यही बैटरी आपके पावर का मुख्य स्रोत होती है दूसरा इसमें इस बैटरी को चार्ज करने के लिए एक बैटरी चार्ज होता है जिससे बैटरी चार्ज होती रहती है इसके अलावा इसमें एक छोटा इनवर्टर होता है जो डीसी सप्लाई को इसी में कन्वर्ट करता है

साथ में Static Bypass/UPS Bypass Switch होता है जब लाइट आ रही होती है तो यह बाई बस आपकी बैटरी को चार्ज करता रहता है और जैसे ही लाइट चली जाती है Static Bypass Switch ऑटोमेटिक सर्किट को बंद कर देता है और आपके यूपीएस में लगे हुए इनवर्टर को ऑन कर देता है इसमें एक कोई भी समय नहीं लेता है यानी आपके कंप्यूटर को पता ही नहीं चलता है कि लाइट चली गई है


यूपीएस और इन्वर्टर में क्या अंतर है

बहुत सारे लोग जानना चाहते हैं कि यूपीएस में और इनवर्टर में क्या अंतर है जबकि दोनों एक ही काम करते हैं लाइट जाने के बाद वह आपको पावर सप्लाई देते हैं तो आपके लिए दोनों में अंतर जानना बहुत जरूरी है 
  • जहां एक ओर इनवर्टर आपके पूरे घर की सप्लाई का लोड उठाने के लिए पर्याप्त है वही यूपीएस केवल आपके कंप्यूटर की सप्लाई के लिए ही बनाया गया है यानी अगर आप इसे घर के साथ जोड़ देंगे तो यह काम नहीं कर पाएगा
  • अगर बात करें पावर कट की तो इनवर्टर की अपेक्षा यूपीएस में जो पावर बैकअप है वह बहुत तेजी से प्रदान किया जाता है जिसमें ना के बराबर समय लगता है जबकि इनवर्टर की लाइट कुछ माइक्रोसेकंड के लिए कट करती है और इसी कट में आपका कंप्यूटर बंद हो सकता है
  • अगर बैकअप की बात करें तो इसमें इनवर्टर का बैकअप यूपीएससी बहुत ज्यादा होता है जहां एक ओर यूपीएस 10 से 15 मिनट तक का बैकअप दे सकता है वही इनवर्टर 7 से 8 घंटे का बैकअप दे देता है 
  • अगर बात करें रखरखाव की तो कंप्यूटर के यूपीएस का रखरखाव ना के बराबर होता है या नहीं अगर एक बार आपने यूपीएस खरीद लिया तो अगली बार बस आपको उसकी बैटरी चेंज करनी है वह भी 2 से 3 साल बाद वही इनवर्टर की बैटरी आपको हर 2 साल बाद तो बदलनी होती है साथ में उसमें बीच बीच में पानी भी भरना होता है
  • अगर कीमत की बात करें तो यूपीएस 1500 से 3000 तक के बीच में मिल जाता है वही इनवर्टर अगर आपको लगवाना है तो आपको 15 से 20000 खर्च करने होंगे वैसे अब काफी सारे इनवर्टर भी यूपीएस मोड में आने लगे हैं 

ऑफलाइन UPS या ऑनलाइन UPS किसेे कहतेे हैं (Online and Offline UPS in Hindi)

जो यूपीएस आपके घर के कंप्यूटर पर लगा होता है उसे ऑनलाइन यूपीएस (Online UPS) या लाइन-इन्टरैक्टिव यूपीएस (Line Interactive UPS) कहते हैं ऐसे यूपीएस की बैटरी उसके अंदर लगी होती है आपके घर में जो डेक्सटॉप पर यूपीएस होता है वह आकार में छोटा होता है लेकिन बहुत से ऑनलाइन यूपीएस बड़े आकार के भी होते हैं और उसके अंदर लगी हुई बैटरी की संख्या भी ज्यादा होती है 

ऑफलाइन यूपीएस में यूपीएस की बैटरी उससे बाहर होती है आपके घर के इनवर्टर को ऑफलाइन यूपीएस कहते हैं और यह ऑनलाइन यूपीएस से ज्यादा लोन ले सकता है लेकिन पावर ट्रिप के दौरान इसका बैकअप रिस्पांस टाइम ऑनलाइन यूपीएस के अपेक्षाकृत कम होता है

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Friday, May 3, 2019

May 03, 2019

रोम क्या है और रोम के प्रकार - What is ROM in computer in Hindi

रैम क्‍या है (What is ROM ) यह जान चुके हैं यहां में हम जानने वाले हैं ROM क्या है या Computer ROM क्या है, जब भी आप नया मोबाइल या Computer खरीदते होंगे तो आपको वहां पर दो शब्द जरूर दिखाई देते होंगे रोम (ROM) और रैम (RAM) इसमें रैम (RAM)  तो हम समझ चुके हैं कि कंप्यूटर में किस तरह से उपयोगी होती है लेकिन रोम (ROM) भी कंप्यूटर या आपके मोबाइल फोन के लिए बहुत उपयोगी होती है इस पोस्ट में हम जाने वाले हैं रोम (ROM) क्या होती है और क्या रोम आपके कंप्यूटर के लिए उपयोगी होती है और इसके अलावा रोम कितने प्रकार की होती है तो आईये जानते हैं रोम क्या है और रोम के प्रकार - What Is ROM And Its Types in Hindi 

रोम क्या है  - What is ROM  in Hindi

रोम का फुल फॉर्म (rom full form) क्या है ?

ROM का फुल फॉर्म या पूरा नाम Read Only Memory होता है और जैसा कि इसके नाम से पता चलता है इसमें स्‍टोर डाटा को केवल रीड किया जा सकता है उसे मिटाया या दोबारा नहीं लिखा जा सकता है

कंप्यूटर विज्ञान / कंप्यूटर साइंस क्या है

रोम क्या है - What is ROM in Hindi

कंप्यूटर में दो प्रकार की मेमोरी होती हैं प्राइमरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी, प्राइमरी मेमोरी में हमने आपको रैम के बारे में जानकारी दी थी रैम की तरह ही रोम भी कंप्यूटर की एक प्राइमरी मेमोरी है जिसे हम रीड ओनली मेमोरी (Read Only Memory) भी कहते हैं रोम का प्रयोग कंप्यूटर में फर्म वेयर (Firmware) सॉफ्टवेयर को स्टोर करने के लिए किया जाता है फर्म वेयर (Firmware) सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में उस समय इंस्टॉल किए जाते हैं जिस समय उनको फैक्ट्री में बनाया जाता है इसलिए इन सॉफ्टवेयर के हार्डवेअर के सॉफ्टवेयर भी कहा जाता है फर्म वेयर सॉफ्टवेयर रोम में इनस्टॉल रहते हैं

रोम की विशेषता Characteristic of Read-Only Memory

कंप्यूटर की पावर ऑफ करने के बाद भी रूम के कंटेंट डिलीट नहीं होते हैं और इसी वजह से रोम को नॉन वोलेटाइल भी कहा जाता है नॉन वोलेटाइल ऐसी मेमोरी को कहा जाता है जिनमें डाटा लाइट जाने के बाद भी नष्ट नहीं होता है यानि रोम भी एक नॉन वोलेटाइल मेमोरी (non-volatile memory) है 

रोम में स्थित डाटा को ना तो परिवर्तित किया जा सकता है और ना ही बदला जा सकता है अगर बदलने की जरूरत भी हो तो इसमें बहुत कठिनाई होती है रोम में कोई भी डाटा या प्रोग्राम यूजर के द्वारा नहीं लिखा जाता है इसमें जो भी प्रोग्राम इंस्टॉल किए जाते हैं जैसे कि फर्म वेयर (Firmware) उन्हें मैन्युफैक्चरिंग के समय ही इसमें इंस्टॉल कर दिया जाता है यानी रूम में स्थाई तरह के प्रोग्राम और अन्य सूचनाओं को स्टोर किया जाता है जिन्हें कभी भी बदला नहीं जा सकता है अगर बदला भी जाएगा तो एक विशेष प्रकार के सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होगी

रोम के प्रकार - Types of ROM

ROM 3 प्रकार के होते हैं जो कि इस प्रकार हैं-
  • PROM-(PROGRAMABLE READ ONLY MEMORY)
  • EPROM-(ERASABLE AND PROGRAMABLE READ ONLY MEMORY)
  • EEPROM-(ELECTRICALLY ERASABLE AND PROGRAMABLE READ ONLY MEMORY)

पी रोम - PROM - (PROGRAMABLE READ ONLY MEMORY)

यह एक ऐसी ROM होती है जिसमें प्रोग्रामों की सहायता से सूचनाओं को रूम में स्थाई रूप से स्टोर कर दिया जाता है और PROM की एक विशेषता होती है इसे केवल एक ही बार प्रोग्राम किया जा सकता है और प्रोग्राम करने के बाद इसको इरेज़ नहीं किया जा सकता है और ना ही प्रोग्राम को अपग्रेड किया जा सकता है

ई पी रोम - EPROM-(ERASABLE AND PROGRAMABLE READ ONLY MEMORY)

ई पी रोम एक ऐसी मेमोरी होती है जिसे इरेज़ किया जा सकता है और दोबारा से प्रोग्राम भी किया जा सकता है जब ई पी रोममें कोई प्रोग्राम स्टोर किया जाता है तो उसे चिप में ही रखी गई विद्युत धारा द्वारा स्थाई रखा जाता है ई पी रोम के अंदर विद्युत धारा से चार्ज करके प्रोग्राम स्टोर किए जाते हैं जो चार्ज इस चिप में डाला जाता है वह 10 वर्षों से भी अधिक समय तक रहता है क्योंकि उसे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता है अगर ई पी रोम स्टोर प्रोग्रामों को हटाना हो या मिटाना हो तो अल्ट्रावायलेट लाइट (Ultraviolet light) का प्रयोग करके ही मिटाया जा सकता हैलगभग 40 मिनट तक अल्ट्रावॉयलेट लाइट का इस्तेमाल किया जाता है इस रूम को इरेज़ करने के लिए

ई ई पी रोम - EEPROM-(ELECTRICALLY ERASABLE AND PROGRAMABLE READ ONLY MEMORY)

ई ई पी रोम कि यह खासियत होती है कैसे 10000 बार इरेज़ किया जा सकता है और प्रोग्राम किया जा सकता है इसको प्रोग्राम करने में और इरेज करने में लगभग 10 मिली सेकंड का समय लगता है ई ई पी रोम एक ऐसी रोम है जिसे फिर से प्रोग्राम करने के लिए सर्किट से हटाने यह निर्माता के पास भेजने की कोई जरूरत नहीं है कोई एक विशेष सॉफ्टवेयर द्वारा इसे कंप्यूटर में ही प्रोग्राम किया जा सकता है 

अंत में -

यह उन लोगों की समझ में ज्यादा अच्छे से आएगा जो लोग अपने कंप्यूटर में आए दिन ऑपरेटिंग सिस्टम इनस्टॉल करते रहते हैं जब आप ऑपरेटिंग सिस्टम इनस्टॉल करते हैं तो आपने देखा होगा आप डिलीट या f2 दबाकर बायॉस सेटअप ओपन करते हैं लेकिन जब आपके कंप्यूटर में कोई ऑपरेटिंग सिस्टम है ही नहीं तो यह बायॉस कहां पर इंस्टॉल है असल में जो बायॉस है वह आपकी रोम में इंस्टॉल रहता है और यह हार्डवेयर का सॉफ्टवेयर है जैसा कि ऊपर बताया है रोम मदर बोर्ड पर लगी हुई एक चिप होती है जिसमें फर्म वेयर (Firmware) सॉफ्टवेयर इंस्टॉल रहते हैं

अगर आप सोचते हैं कि रूम केवल आपके कंप्यूटर में ही होती है तो ऐसा नहीं है रूम उस हर मशीन में होती है जिसमें एक प्रोग्राम होता है रोम आपकी वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, माइक्रोवेव ओवन और टीवी आदि में भी होती है जिनमें प्रोग्रामेबल फंक्शन होते हैं और यह फंक्शन उसमें इस समय उस समय इंस्टॉल किए जाते हैं जिस समय इनको फैक्ट्री में बनाया जाता है

यानी रोम एक ऐसी मेमोरी है जो नॉन वोलेटाइल मेमोरी (non-volatile memory) है यानी बिजली जाने के बाद भी इसमें डाटा स्टोर रहता है इसे बदलना या परिवर्तित करना बहुत मुश्किल होता है अगर बदला भी जा सकता है तो एक विशेष सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है आपने देखा होगा कि आपके फोन में या आपके टीवी में कभी-कभी फर्म वेयर (Firmware) का ऑप्शन आता है यह अपडेट सिर्फ कंपनी ही द्वारा किया जा सकता है तो अगर फर्मवेयर अपडेट हो रहा है तो समझ लीजिए आपकी रोम में कुछ अपग्रेड हो रहा है

अधिक जानकारी के लिये आप हमारा Youtube Channel देख सकते हैं हमारे Youtube Channel पर उपयोगी वीडीयो कंप्यूटर नोट्स (Computer Notes) उपलब्‍ध हैं जो आपके बहुत काम आयेगें

Saturday, July 21, 2018

July 21, 2018

कंपोनेंट्स ऑफ़ कंप्यूटर सिस्टम - What is a System Component

जैसा कि आप जानते हैं कंप्यूटर (Computer) कई सारे भागों से मिलकर बना होता है इस पोस्ट में हम जानने वाले हैं Computer system के विभिन्न Component जिसकी सहायता से वह ठीक प्रकार से कार्य कर पाता है तो आइए जानते हैं एक Computer system के कंपोनेंट्स के बारे में - कंपोनेंट्स ऑफ़ कंप्यूटर सिस्टम - What is a System Component

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कंप्यूटर सिस्टम के कंपोनेंट्स के प्रकार (Components Of A Computer System)

जैसा कि हम जानते हैं कंप्यूटर तीन प्रकार के होते हैं एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer) डिज़िटल कम्प्यूटर (Digital Computer) और हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer) अधिकतक डिजिटल कंप्‍यूटर ही प्रयोग में आते हैं और यहां हम डिज़िटल कम्प्यूटर (Digital Computer) के कंपोनेंट्स के बारे में बात करने वाले हैं डिजिटल कंप्यूटर के पांच मुख्‍य फंक्शनल यूनिट होती हैं - 
  1. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU)
  2. विजुअल डिस्प्ले यूनिट (VDU), कीबोर्ड और माउस
  3. अन्य इनपुट एवं आउटपुट डिवाइसेज
  4. कंप्यूटर मेमोरी
  5. हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का कांन्सेप्ट 

    1- सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU)


    कंप्‍यूटर की संरचना (Computer Architecture) में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)  केन्‍द्र में रहता है इनपुट यूनिट (Input unit) द्वारा डाटा और निर्देशों को कंप्‍यूटर में एंटर किया जाता है और इसके बाद सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) डाटा को प्रोसेस करता है और आपको आउटपुट देता है, डाटा को प्रोसेेस करनेे में यह अपने दो भागोंं की मदद लेता है अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) और कंट्रोल यूनिट (Control Unit) -

    प्रोसेसिंग से पहले प्राइमरी मेमोरी (Primary memory में जो डाटा होता है और जो निर्देश होते हैं वह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट में ट्रांसफर हो जाते हैं और वहां पर उनकी प्रोसेसिंग का कार्य होता है Arithmetic logic unit (ALU) से जो परिणाम मिलते हैं उनको प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर कर दिया जाता है और प्रोसेसिंग समाप्त होने के बाद में प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा बचता है या अंतिम परिणाम बचते हैं वह एक आउटपुट डिवाइस (Output device) के माध्यम से आप तक पहुंचा दिए जाते हैं -
      इनपुट डिवाइस से डाटा कब लेना है स्टोर यूनिट में डाटा कब डालना है वैल्यू से डाटा को कब लेना है और जब वह डाटा प्रोसेस हो जाए उसको आउटपुट डिवाइस तक कब भेजना है यह सारे काम करता है कंट्रोल यूनिट

      1 - अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit )

      अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) अंकगणितीय गणना (Arithmetic Calculation) और तार्किक गणना (Logical calculation) का काम करता है, जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग और <, >, =, हाँ या ना

      2- कंट्रोल यूनिट (Control Unit)

      कंट्रोल यूनिट (Control Unit) कंप्‍यूटर में हो रहे सारे कार्यो नियंत्रित करता है और इनपुट, आउटपुट डिवाइसेज, और अर्थमेटीक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) के सारे गतिविधियों के बीच तालमेल बैठाता है।

      2- विजुअल डिस्प्ले यूनिट (VDU), कीबोर्ड और माउस

      3- इनपुट एवं आउटपुट डिवाइसेज

      4 - कंप्‍यूटर मैमोरी ( Computer Memory )

      5- हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का कांन्सेप्ट 

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      Friday, April 20, 2018

      April 20, 2018

      कंट्रोल यूनिट (CU) क्या है - What is Control Unit in CPU

      कंट्रोल यूनिट (Control Unit) सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट यानि CPU का एक मुख्‍य घटक होता है इसे नियंत्रण इकाई भ्‍ाी कहते हैं शार्ट में इसे CU भी कहा जाता है तो आईये जानते हैं कंट्रोल यूनिट (Control Unit) क्‍या है और यह सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट यानि CPU में क्‍या काम करती है - What is Control Unit in CPU

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      कंट्रोल यूनिट क्या है - What is Control Unit in CPU in Hindi

      आप तो जानते हैं कंप्‍यूटर कोई भी काम करने के लिये प्रोसेंसिग करता है प्रोसेसिंग काम होने की प्रकिया को कहा जाता है जिसमें यूजर द्वारा इनपुट डाटा को सूचना में परिवर्तन किया जाता है प्रोसेसिंग की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है - 
      1. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है 
      2. कंप्यूटर में बूटिंग क्या होती है

      प्रोसेसिंग क्या होता है -What is Processing

      आपके द्वारा इनपुट डाटा की सभी प्रकार की गणना और तुलना अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) में होती हैं प्रोसेसिंग से पहले प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा होता है और जो निर्देश होते हैं वह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट में ट्रांसफर हो जाते हैं और वहां पर उनकी प्रोसेसिंग का कार्य होता है Arithmetic logic unit (ALU) से जो परिणाम मिलते हैं उनको प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर कर दिया जाता है और प्रोसेसिंग समाप्त होने के बाद में प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा बचता है या अंतिम परिणाम बचते हैं वह एक आउटपुट डिवाइस (Output device) के माध्यम से आप तक पहुंचा दिए जाते हैं

      कैसे और क्‍या काम करता है कंट्रोल यूनिट

      इस सारी प्रोसेसिंग की प्रक्रिया को कंट्रोल करता है कंट्रोल यूनिट यानी इनपुट डिवाइस को डाटा कहां से लेना है उसको स्टोरेज डिवाइस में कब डालना है एलयू को एक बार डेटा कब लेना है और डेटा का क्या करना है और अंतिम परिणाम को आउटपुट डिवाइस तक कैसे भेजना है यह सारे काम कंप्यूटर सिस्टम के कंट्रोल यूनिट (CU) से ही संभव होते हैं वह प्रोग्राम निर्देशों को सेलेक्ट करता है उनका समझता है तथा कंट्रोल यूनिट पूरी सिस्टम की कार्यप्रणाली को निर्देशित करने का काम करता है और प्रोग्राम का पालन करने में सक्षम होता है

      यानी सोचने का काम करता है अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट और प्रोग्रामर द्वारा सभी प्रोग्राम्स में जो निर्देश दिए जाते हैं , उन सभी निर्देशों का पालन कराने का काम करता है कंट्रोल यूनिट, कंट्रोल यूनिट मेन मेमोरी में स्‍टोर किए गए सारे प्रोग्राम से निर्देशों को प्राप्त करता है उन निर्देशों का अर्थ करता है और उनको इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स में कंवर्ट कर देता है जो सिस्टम के अन्य यूनिट को उनके कार्यों को करने के लिए सक्रिय करता है 

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      Thursday, April 19, 2018

      April 19, 2018

      अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) क्‍या है - What is Arithmetic logic unit (ALU) in Hindi

      जैसा कि आप जानते हैं प्रोसेसर (Processor) को कंप्यूटर का दिमाग कहा जाता है जैसे हमारा दिमाग सोचने समझने का काम करता है उसी प्रकार से प्रोसेसर भी सोचने और समझने का काम करता है लेकिन उसके लिए उसे जरूरत होती है (ए. एल.यु.) की यानी अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit) की तो आइए जानते हैं क्या है यह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU) और यह किस प्रकार काम करती है - What is Arithmetic logic unit in Hindi

      अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) क्‍या है - What is Arithmetic logic unit (ALU) in Hindi

      अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) क्‍या है - What is Arithmetic logic unit (ALU) in Hindi

      अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic logic unit) सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के मुख्य तीन घटकों में से एक है जिसमें मेमोरी यूनिट (Memory unit) और कंट्रोल यूनिट (Control unit) भी शामिल है ALU कंप्यूटर हार्डवेयर में एक डिजिटल सर्किट होता है, अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट का मुख्य कार्य होता है अंकगणितीय तर्क इकाई अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट का मुख्य कार्य होता है अंकगणितीय कार्य करना जैसे जोड़ना घटाना गुणा करना भाग करना और गणित की तरह और भी जितने कार्य होते हैं वह करना इसके अलावा तर्क संबंधित कार्य जितने भी होते हैं जैसे तुलना करना चयन करना मिलान करना डाटा को आपस में मर्ज करना इस प्रकार की कार्य अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU)  करती है एएलयू को मुख्य रूप से बेसिक अर्थमेटिक ऑपरेशन के लिए ही डिजाइन किया गया है -

      1. हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना
      2. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट क्या है 
      3. कंप्यूटर में बूटिंग क्या होती है

      अर्थमेटिक ऑपरेशन (Arithmetic operation)

      • + Add (जोडना)
      • - Subtract (घटाना)
      • x Multiply (गुणा करना)
      • / Divide ( भाग देना)

      लॉजिक ऑपरेशन (logic operation)

      • < Less then (छाेटा है) 
      • = equal to (बराबर है) 
      • > Greater then (बडा है)
      यह सभी प्रकार की गणना और तुलना अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ए. एल.यु.) में होती हैं प्रोसेसिंग से पहले प्राइमरी मेमोरी (Primary memory में जो डाटा होता है और जो निर्देश होते हैं वह अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट में ट्रांसफर हो जाते हैं और वहां पर उनकी प्रोसेसिंग का कार्य होता है Arithmetic logic unit (ALU) से जो परिणाम मिलते हैं उनको प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर कर दिया जाता है और प्रोसेसिंग समाप्त होने के बाद में प्राइमरी मेमोरी (Primary memory) में जो डाटा बचता है या अंतिम परिणाम बचते हैं वह एक आउटपुट डिवाइस (Output device) के माध्यम से आप तक पहुंचा दिए जाते हैं

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      Monday, April 16, 2018

      April 16, 2018

      हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना - Physical Structure Of Hard Disk in Hindi

      हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) होती है इसका प्रयोग बड़े पैमाने पर डाटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है और तेज गति से दोबारा से प्राप्त किया जा सकता है आईये जानते हैं हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना - Physical Structure Of Hard Disk in Hindi 

      हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना - Physical Structure Of Hard Disk in Hindi

      हार्ड डिस्क की भौतिक संरचना - Physical Structure Of Hard Disk in Hindi


      असल में हार्ड डिस्क कई सारी प्‍लैटरों को मिलाकर एक एयरटाइट केस में एक के ऊपर एक लगाकर यानी डिस्‍क का ढेर बनाकर एक हार्ड डिस्क का निर्माण किया जाता है प्रत्येक प्‍लैटर एक पतली गोलाकार धातु प्लेट का बना होता है जिसके दोनों ओर मैग्नेटिक लेयर होती है यानी मैग्नेटिक पदार्थ की कोटिंग होती है आजकल जितने भी प्लैटर होते हैं वह 3.5 इंच डायमीटर के होते हैं

      मान लीजिए एक कंप्यूटर जिसमें 80 GB या उससे अधिक क्षमता की हार्ड डिस्क का प्रयोग होता है उसमें 7 या अधिक डिस्क एक केंद्रीय शाफ्ट पर लगी होती हैं जो लगभग 2400 से 7200 आरपीएम यानी चक्कर प्रति मिनट की स्पीड से घूमती हैं यह प्‍लैटर एक दूसरे से 1.5 इंच की दूरी पर लगे होते हैं प्रत्येक प्‍लैटर के ऊपर और नीचे रीड और राइट हेड दिया गया होता है जो एक मूबेबल आर्म के साथ जुड़ा होता है दो प्‍लेटर के बीच लगे आर्म दो रीड और राइट हैड लेकर चलते हैं, अत एक 6 प्‍लेटर वाली हार्डडिस्‍क को 12 हेड वाली डिस्‍क भी कहा जा सकता है
      हार्ड डिस्क में जितनी भी डिस्क होती हैं वह समान गति पर घूमती हैं व समान दिशा में घूमती हैं आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हार्ड डिस्क की सबसे ऊपरी सतह और सबसे निचली सतह पर डाटा स्टोर नहीं होता है बाकी जितनी में डिस्क होती हैं उन सभी सतह  पर डाटा स्टोर किया जा सकता है प्रत्येक डिस्क में कई सारे अदृश्य व्रत होते हैं जिन्हें ट्रैक कहा जाता है इन ट्रैकों को एक नंबर दिया जाता है सबसे बाहरी ट्रक का जो नंबर होता है वह जीरो होता है अब हर डिस्क पर यह ट्रैक दिए गए होते हैं और एक ही नंबर वाले सभी ट्रैक एक सिलेंडर का निर्माण करते हैं  इस प्रकार एक हार्डडिस्‍क में जिसमें 10 प्‍लैटर होते हैं और 18 रिकार्डिग सतहेंं होती हैं क्योंकि हार्ड डिस्क की सबसे ऊपरी सतह और सबसे निचली सतह पर डाटा स्टोर नहीं होता है इसलिये वह 18 ही होती हैं और इस तरह सिलेंडर में 18 ट्रैक होते हैं


      लेटेंसी टाइम (Latency time) और सीक टाइम (seek time) 

      अब समझ लेते हैं लेटेंसी टाइम और सीक टाइम क्या होता है एक डिस्‍क में निश्चित ट्रैक पर पहुंचने में लगने वाले समय को लेटेंसी टाइम (Latency time) कहा जाता है और रिकॉर्ड को पढ़ने में अलने वाले समय को सीक टाइम (seek time) कहा जाता है लेटेंसी टाइम (Latency time) और सीक टाइम (seek time) दोनों मिलाकर कुल समय एक हार्डडिस्‍क का एक्सेस टाइम (Access time) को बोला जाता है

      अब जान लेते हैं हार्ड डिस्क में डाटा को कैसे व्यवस्थित रखा जाता है डाटा को व्यवस्थित रखने के लिए डॉस मेमोरी डिस्क को दो भागों में बांटती है पहला सिस्टम एरिया और दूसरा डाटा एरिया
      1- सिस्टम एरिया (System Area)
      सिस्टम एरिया हार्ड डिस्क का कुल 2% होता है जो डिस्क की मूल संरचना को संगठित करने के लिए प्रयोग किया जाता है सिस्टम एरिया तीन भागों में बटा होता है -
      1. बूट रिकोर्ड्स(Boot Records)
      2. फैट(FAT)
      3. रूट डायरेक्टरी (Root Directory)

      1- बूट रिकोर्ड्स (Boot Records)

      बूट रिकोर्ड्स (Boot Records) को पार्टीशन सेक्टर भी कहा जाता है एक सेक्टर का आकार 512 बाइट का होता है जिसके पहले सेक्टर का उपयोग किया जाता है इन बूट्स एक्टर्स में निम्नलिखित जानकारी होती है जैसे डिस्क का प्राइमरी पार्टीशन टेबल कहां रखना है कंप्यूटर स्टार्ट करने की प्रक्रिया के लिए आवश्यक कोड और निर्देश की जानकारी आदि रहती है 

      2- फैट(FAT)

      फैट(FAT) की फुल फॉर्म है फाइल एलोकेशन टेबल जिसे संक्षेप में फैट कहा जाता है फैट(FAT) टेबल बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसमें डाटा का पूरा रिकॉर्ड रहता है कि वह कहां पर स्टोर किया जाना है

      3- रूट डायरेक्टरी (Root Directory)

      कंप्यूटर के फाइल सिस्टम के डायरेक्टरी संखला की पहली डायरेक्टरी रूट डायरेक्टरी (Root Directory) होती है इसे मूल डायरेक्टरी के नाम से भी जानते हैं इसी में सभी अन्य फाइल है डायरेक्टरी और सब डायरेक्टरी का हिसाब-किताब रहता है

      2- डाटा एरिया (Data Area)

      2% हिस्सा सिस्टम एरिया कवर करता है तो 98% प्रतिशत हिस्सा डाटा एरिया (Data Area) कवर करता है हमारे द्वारा बनाई गई सभी प्रकार की फाइलें और डाटा इसी डाटा एरिया में तो रहता है यह पूरा डिटेल या छोटे-छोटे क्लस्टर में विभाजित रहता है 

      Tuesday, March 6, 2018

      March 06, 2018

      रजिस्टर मेमोरी क्‍या है - What is Register Memory in Hindi

      रजिस्टर मेमोरी (Register Memory) भी कंप्यूटर मेमोरी (Computer Memory) का ही एक भाग है रजिस्टर मेमोरी (Register Memory) CPU में रजिस्टर के रूप में स्थित होती है तो आईये जानते हैं रजिस्टर मेमोरी क्‍या है - What is Register Memory in Hindi

      What is Register Memory in Hindi

      रजिस्टर मेमोरी क्‍या है - What is Register Memory in Hindi

      रजिस्टर मेमोरी (Register Memory) को रजिस्‍टर भी कह सकते हैं, रजिस्टर मेमोरी कंप्यूटर में सबसे छोटी और सबसे तेज मेमोरी होती है, रजिस्टर मेमोरी का साइज 16, 32 और 64 Bit का होता है आप तो जानते हैं सीपीयू में कोई डेटा स्‍टोर नहीं होता है, रजिस्टर मेमोरी (Register Memory) आकार में बहुत छोटी लेकिन सीपीयू द्वारा बार-बार इस्तेमाल होने वाले डेटा निर्देश (Data instruction) और मेमोरी का पता को अपने अंदर अस्‍थाई रूप स्‍टोर लेती है

      रजिस्टर मेमोरी (Register Memory) दो प्रकार की होती है -
      1. मेमोरी एड्रेस रजिस्टर - MAR
      2. मेमोरी बफर रजिस्टर - MBR 

      मेमोरी एड्रेस रजिस्टर - (Memory Address Register)

      कंप्यूटर में, मेमोरी एड्रेस रजिस्टर (MAR) एक सीपीयू रजिस्टर होता है जिसका काम मेमोरी एड्रेस को स्टोर करना होता है जिसमें यह जानकारी स्‍टोर होती है कि सीपीयू डेटा कहां से प्राप्त करेगा और किस पते पर डेटा भेजा जाएगा या स्‍टोर किया जाएगा।

      यह भी पढें -
      1. कैश मेमोरी (Cache Memory)
      2. प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory)
      3. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory)

      मेमोरी बफर रजिस्टर - (Memory Buffer Register)

      मेमोरी बफर रजिस्टर (MBR) को मेमोरी डाटा रजिस्टर (MDR) भी कहते हैं तात्कालिक एक्सेस स्टोरेज से ट्रांसफर किए गए डाटा को स्टोर करता है। इसमें मेमोरी एड्रेस रजिस्टर (MAR) द्वारा मेमोरी एड्रेस की कॉपी होती है जो एक बफर के रूप में कार्य करती है जो प्रोसेसर और मेमोरी इकाइयों को प्रोसेसिंग में मामूली अंतर से प्रभावित किए बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति देता है

      Sunday, March 4, 2018

      March 04, 2018

      कंप्यूटर मेमोरी क्या है - What is Computer Memory in Hindi

      कंप्यूटर मेमोरी (Computer Memory) कंप्‍यूटर की संरचना के अनुसार कंप्यूटर का वह भाग है यूजर द्वारा इनपुट किये डाटा और प्रोसेस डाटा को स्‍टोर करती है, मेमोरी (Memory) कम्प्यूटर का बुनियादी घटक है आईये जानते हैं कंप्यूटर मेमोरी क्या है - What is Computer Memory in Hindi

      कंप्यूटर मेमोरी क्या है - What is Computer Memory in Hindi

      कंप्यूटर मेमोरी क्या है - What is Computer Memory in Hindi

      वैसे तो CPU को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है, लेकिन जहां मनुष्‍य का मस्तिष्‍क बहुत सारे काम करने के साथ-साथ हमारी यादों को भी सुरक्षित रखने का काम करता है वहीं सीपीयू (CPU) केवल अंकगणितीय गणना (Arithmetic Calculation) और तार्किक गणना कर इनपुट डाटा को प्रोसेस करता है, प्रोसेस डाटा को सुरक्षित नहीं रख सकता है, अब उस प्रोसेस डाटा को कहीं सुरि‍क्षित भी रखना होता है, तो इस कार्य जिम्‍मा कंप्यूटर मेमोरी (Computer Memory) के पास होता है, कंप्यूटर मेमोरी को बहुत सारे छोटे भागों में बाँटा गया है, जिन्हें हम सेल कहते हैं। प्रत्येक सेल का यूनिक एड्रेस या पाथ होता है। आप जब भी कोई फाइल कंप्‍यूटर में सुरक्षित या सेव करते हैं तो वह एक सेल में सेव होती है-

      कंप्यूटर मेमोरी दो प्रकार की होती है - 

      1. परिवर्तनशील -(Volatile) इसे प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) के नाम से भी जाना जाता है, इसे मुख्य मेमोरी भी कहते हैं, यह सीधे सीपीयू के सम्‍पर्क में रहती है तथा इसके डेटा और निर्देश का CPU द्वारा तीव्र तथा प्रत्यक्ष उपयोग होता है, इसे परिवर्तनशील - (Volatile) मेमोरी इसलिये कहा जाता है क्‍योंकि यह मेमोरी डेटा को परमानेंटली स्‍टोर नहीं कर सकती है उदाहरण - रैम 
      2. अपरिवर्तनशील - (Non-volatile) - इसे सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) के नाम से जाना जाता है इसका प्रयोग को ज्‍यादा मात्रा में डेटा को स्थायी रूप से स्‍टोर करने के किया जाता है इसलिये द्वितीय सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) को स्टोरेज बताया गया है ना कि मेमोरी उदाहरण - हार्डडिस्‍क 

      स्‍पेस के आधार पर कंप्यूटर मेमोरी (Computer Memory) चार प्रकार की होती है - 

      1. रजिस्टर मेमोरी (Register Memory)
      2. कैश मेमोरी (Cache Memory)
      3. प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory)
      4. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory)

      कंप्‍यूटर मेमोरी की इकाई या यूनिट - Computer Memory Units in Hindi 

      जिस प्रकार समय मापने के लिये सैकेण्‍ड, आवाज को नापने के लिये डेसीबल, दूरी को नापने के लिये मि0मि और वजन को नापने के लिये ग्राम जैसे मात्रक हैं, इसी प्रकार कम्‍प्‍यूटर की दुनिया में स्‍टोरेज क्षमता का नापने के लिये भी मात्रकों का निर्धारण किया गया है, इसे कंप्‍यूटर मेमोरी की इकाई या यूनिट कहते हैं -

      कंप्यूटर मेमोरी (Computer Memory) की सबसे छोटी इकाई होती है बिट (bit) एक बिट बाइनरी संकेत अर्थात 0 और 1 में से केवल एक युग्म मूल्य (binary value) होता है और जब चार बिट को मिला दिया जाता है तो उसे निब्‍बल (Nibble) कहते हैं यानी 1 निब्‍बल = 4 बिट बाइट (Byte) 8‍ बिट के एक समूह को बाइट कहते हैं।

      सामान्‍यत एक जब आप एक अंक या अक्षर अपने कम्‍प्‍यूटर में टाइप करते हैं तो उसको एक बाइट से व्‍यक्‍त किया जाता है या सीधे शब्‍दों में कहें तो वह एक बाइट के बराबर जगह घेरता है। यानी 1 बाइट = 8 बिट = 2 निब्‍बल इस प्रकार लगभग 11099511627776 बाटइ के समूह को टैराबाइट कहा जाता है और एक टैराबाईट में लगभग 20 लाख MP3 को स्‍टोर किया जा सकता है।
      • 1 बिट (bit) = 0, 1 
      • 4 बिट (bit) =  1 निब्‍बल 
      • 8‍ बिट = 1 बाइट्स (Byte)
      • 1000 बाइट्स (Byte) = एक किलोबाइट (KB)
      • 1024 किलोबाइट (KB) = एक मेगाबाइट (MB)
      • 1024 मेगाबाइट (MB) = एक गीगाबाइट (GB)
      • 1024 गीगाबाइट (GB) = एक टेराबाइट (TB)
      • 1024 टेराबाइट (TB) = एक पेंटाइट (PB)
      • 1024 पेडाबाइट (PB) = एक एक्साबाइट (EB)
      • 1024 एक्साबाइट (EB) = एक ज़ेटबाइट (ZB)
      • 1024 ज़ेटाबाइट (ZB) = एक ज़ेटबाइट (YB) 
      March 04, 2018

      सेकेंडरी मेमोरी क्‍या होती है - What is Secondary Memory in Hindi

      सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) के नाम से ही पता चलता है कि यह कंप्‍यूटर की प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) से अलग होती है यानि यह आन्तरिक (Internal) भाग नहीं होती है, सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) को कंप्‍यूटर में अलग से जोडा जाता है इसे कंप्यूटर की द्वितीय मेमोरी (Secondary Memory) भी कहा जाता है तो आईये जानते हैं कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी क्‍या होती है - What is a Secondary Memory in Hindi

      What is Secondary Memory in Hindi


      कंप्यूटर की सेकेंडरी मेमोरी क्‍या होती है ? - What is Secondary Memory in Hindi


      सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) को अलग से जोडा जाता है और यह स्‍टोरेज के काम आती है तो इसे सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस भी कहते हैं, प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) के अपेक्षा इसकी गति कम होती है लेकिन इसकी Storage क्षमता प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) अधिक होती है और जरूरत पडने पर इसे अपग्रेड (घटाया या बढाया) किया जा सकता है, आईये जानते हैं सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) कितने प्रकार की होती है -
      1. मैग्नेटिक/चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape)
      2. मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk) 
      3. ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk)
      4. यूऍसबी फ्लैश ड्राइव (USB Flash Drive)

      1- मैग्नेटिक/चुम्बकीय टेप (Magnetic Tape)

      यह देखने में किसी पुराने जमाने के टेप रिकार्डर की कैसेट की तरह होती थी, इसमें प्‍लास्टिक के रिबन पर चुम्बकीय पदार्थ की परत चढी होती थी, जिस पर डाटा स्‍टोर करने के लिये हेड का प्रयोग किया जाता था बिलकुल टेप रिकार्डर की तरह, इस डाटा का कितनी बार लिखा और मिटाया जा सकता था और यह काफी सस्‍ते होते थे


      2- मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk) 

      मैग्नेटिक/चुम्बकीय डिस्क (Megnetic Disk) दो प्रकार की होती हैं - 
      1. फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)
      2. हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive)

      फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)

      फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) के बहुत पतले प्‍लास्टिक की एक गोल डिस्‍क होती है जो एक प्‍लास्टिक के कवर में बंद रहती थी, इस डिस्‍क पर चुम्बकीय पदार्थ की परत चढी होती थी, फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) आकार एवं और स्‍टोरेज के आधार पर दो प्रकार की होती है - 
      1. मिनी फ्लॉपी (Mini Floppy) - मिनी फ्लॉपी (Mini Floppy) का व्‍यास (Diameter) 3½ इंच होता है और इसकी स्‍टोरेज क्षमता 1.44 MB होती है इसे कंप्‍यूटर में रीड करने के लिये 3½ इंच के फ्लॉपी डिस्क रीडर (Floppy disk reader) की आवश्‍यकता होती है, यह लगभग 360 RPM यानि Revolutions Per Minute यानि चक्‍कर/घूर्णन प्रति मिनट की दर से घूमती है इसी प्रकार 
      2. माइक्रो फ्लॉपी (Micro Floppy) - माइक्रो फ्लॉपी (Micro Floppy) का व्‍यास (Diameter) 5½ इंच होता है और इसकी स्‍टोरेज क्षमता 2.88 MB होती है, इसके भी 5½ इंच के फ्लॉपी डिस्क रीडर (Floppy disk reader) की आवश्‍यकता होती है
      नोट - कंप्‍यूटर में "ए" और "बी" ड्राइव का इस्‍तेमाल फ्लॉपी डिस्क के लिये ही होता था और आज भी वर्तमान में "A" और "B" ड्राइव फ्लॉपी डिस्क के लिये ही Reserveरहती है, हालांकि इसका प्रयोग बिलकुल बंद हो चुका है

      हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive)

      आपको बता दें कि दुनिया की पहली हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) के निर्माता IBM हैं, जिसे 1980 में बनाया गया, यह एक यह एलुमिनियम धातु की डिस्क होती है जिस पर पदार्थ का लेप चढा रहता है, यह डिस्‍क एक धुरी पर बडी तेजी से घूमती है और इसकी गति को RPM यानि Revolutions Per Minute यानि चक्‍कर/घूर्णन प्रति मिनट में मापा जाता है, आजतक बाजार में 5200 RPM और 7200 RPM वाली हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) उपलब्‍ध है, हार्डडिस्‍क ड्राइव में Track और Sector में डाटा स्टोर होता है. एक सेक्टर में 512 बाईट डाटा स्टोर होता है, 80 के दशक में आयी हार्डडिस्‍क ड्राइव जिसके पहले पार्टीशन को नाम दिया गया "C" ड्राइव और आज जब आप विंडोज इंस्‍टॉल करते हो तो वह सबसे पहले "C" ड्राइव में ही इंस्‍टाॅल होती है। अगर स्‍टोरेज की बात करें ताे हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) को प्रमुख सेकेंडरी मेमोरी (Secondary Memory) के तौर पर इस्‍तेमाल किया जाता है वर्तमान में 1 टैराबाइट से लेकर 100 टैराबाइट तक की हार्ड डिस्‍क उपलब्‍ध हैं

      3- ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk)

      ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) में पॉली कार्बोनेट की गोल डिस्‍क होती है, जिस पर एक रासायनिक पदार्थ का लेप रहता है ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) डेटा डिजिटली रूप में सुरक्षित रहता है, डाटा को ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) पर रीड और राइट करने के लिये कम क्षमता वाले लेजर प्रकाश का प्रयोग किया जाता है  ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disk) तीन प्रकार की होती है - 
      1. सीडी (CD)
      2. डीवीडी ड्राइव (DVD)
      3. ब्लू रे (Blu Ray) 

      सीडी (CD )

      सीडी (CD) का पूरा नाम कॉम्‍पेट डिस्‍क है, इसकी क्षमता हार्डडिस्‍क से कम और फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) से ज्‍यादा होती है, इसमें कुछ 700MB डाटा को स्‍टोर किया जा सकता है, इसमें डाटा लगभग 30 वर्षो तक सुरक्षित रह सकता है, लेकिन इसकी सतह पर स्‍क्रैच आने पर डाटा को रीड और राइट करने में परेशानी होती है

      डीवीडी (DVD)

      सीडी (CD) की अपेक्षा डीवीडी (DVD) यानी डिजिटल वर्सटाइल डिस्‍क की स्‍टोरेज क्षमता बहुत अधिक होती है, लेकिन देखने में यह दोनों एक जैसी ही लगती है डीवीडी (DVD)की स्‍टोरेज क्षमता करीब 4.7 जीबी से लेकर 17 जीबी तक होती है, लेकिन स्‍क्रेच वाली समस्‍या यहां भी है

      ब्लू रे (Blu Ray) 

      ब्लू रे (Blu Ray) देखने में CD और DVD की तरह ही होती है लेकिन इसको रीड और राइट करने के लिये जिसे लेजर प्रकाश का प्रयोग किया जाता है वह नीले रंग-जैसी बैंगनी किरण होती है इसलिये इसे ब्लू रे (Blu Ray) कहा जाता है, इस प्रकाश की वजह से ब्‍लूरे डिस्‍क पर 50 जीबी तक डाटा स्‍टोर किया जाता सकता है 

      4- यूऍसबी फ्लैश ड्राइव (USB Flash Drive)

      यह वर्तमान की सबसे पॉपुलर और पोर्टबल सेकेंडरी मेमोरी डिवाइस है जो USB पोर्ट के माध्यम से कंप्यूटर से जोड़ी जाती है जिसे हम पेन ड्राइव के नाम से भी पुकारते है, इसका प्रयोग वीडियो, ऑडियो के अलावा अन्‍य डेटा को सेव करने के लिए किया जाता है

      Thursday, February 22, 2018

      February 22, 2018

      प्राइमरी मेमोरी क्‍या होती है - What Is Primary Memory in Hindi

      कंप्‍यूटर की संरचना के अनुसार मेमोरी (Memory) कंप्यूटर का वह भाग है यूजर द्वारा इनपुट किये डाटा और प्रोसेस डाटा को संगृहीत करती है, मेमोरी (Memory) में डाटा, सूचना, एवं प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहते है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध रहते है इसे प्राथमिक मेमोरी या मुख्य मेमोरी भी कहते हैं आईये प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) के बारे में अधिक जानते हैंं -

      प्राइमरी मेमोरी क्‍या होती है - What Is Primary Memory in Hindi

      प्राइमरी मेमोरी क्‍या होती है - What Is Primary Memory in Hindi

      प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory) दो प्रकार की होती है - 

      1. रैम (RAM) यानि Random Access Memory 
      2. रोम (ROM) यानि Read Only Memory 

      1- रैम (Random Access Memory) 

      इस मेमोरी (Memory) को कंप्‍यूटर की अस्‍थाई मेमोरी भी कहते हैं इसमें कोई भी डाटा स्‍टोर नहीं रहता है जब तक कंप्‍यूटर ऑन रहता है तब तक रैम में डाटा या प्रोग्राम अस्थाई रूप से संगृहीत रहता है और कंप्‍यूटर प्रोसेसर आवश्‍यक डाटा प्राप्‍त करने के लिये इस डेटा का उपयोग करता है और जैसे ही आप कम्‍यूटर शट डाउन करते हैं वैसे ही सारा डाटा डिलीट हो जाता है इस रैम को (Volatile Memory) भी करते हैं

      रैम (RAM) कितने प्रकार की होती है 

      रैम तीन प्रकार की होती है - 
      1. डायनेमिक रैम (Dynamic RAM)
      2. सिंक्रोनस रैम (Synchronous RAM)
      3. स्‍टैटिक रैम (Static RAM)

      1- डायनेमिक रैम (Dynamic RAM) 

      इसे DRAM के नाम से जाना जाता है, डीरैम में डाटा मेमोरी सेल में स्‍टोर होता है, प्रत्‍येक मेमोरी सेल में एक ट्रांजिस्टर और एक कैपेसिटर होता है, जिसमें थोडा थोडा डाटा स्‍टोर किया जाता है लेकिन लगभग 4 मिली सेकेण्‍ड बाद मेमोरी सेल नियंत्रक मेमोरी को रिफ्रेश करते रहते हैं रिफ्रेश करने का अर्थ है कि वह डाटा को रीराइट करते हैं, इसलिये DRAM काफी धीमी होती है, लेकिन यह अन्य मेमोरी के मुक़ाबले कम बिजली खाती है और लंबे समय तक खराब नहीं होती है

      2- सिंक्रोनस रैम (Synchronous RAM)

      सिंक्रोनस रैम DRAM से ज्‍यादा तेज होती है वजह है कि यह DRAM से ज्‍यादा तेजी से रिफ्रेश होती है, सिंक्रोनस रैम CPU Clock Speed के साथ रिफ्रेश होती है, इसलिये ज्‍यादा तेजी से डाटा स्थानांतरित कर पाती है

      3- स्‍टैटिक रैम (Static RAM)

      इसे SRAM के नाम से जाना जाता है, Static RAM कम रिफ्रेश होती हैं लेकिन यह डाटा को मेमोरी में अधिक समय तक रख पाती है, यह डाटा को तब तक स्‍‍टोर रखती है जब तक सिस्‍टम को करंट मिलता रहता है यह बहुत तेजी से डाटा को Access करती है  स्‍टैटिक रैम (Static RAM) को जब तक रिफ्रेश नहींं तब तक डाटा स्‍टाेर रहता है इसे कैश रैम (Cache Ram) भी कहते हैं, जाने क्‍या होती है कैश मेमोरी (Cache Memory)

      2- रोम (ROM) यानि Read Only Memory

      यह एक अस्‍थाई मेमोरी है रोम का पूरा नाम रीड ऑनली मेमोरी होता है, इसको तैयार करते समय जो डेटा या प्रोग्राम डाले जाते हैं वो खत्म नहीं होते हैं कंप्यूटर का स्विच ऑफ होने के बाद भी रोम में संग्रहित डाटा नष्ट नहीं होता हैं इसे Non-volatile Memory भी कहते हैं 

      रोम (ROM) कितने प्रकार की होती है 

      रोम (ROM) तीन प्रकार की होती हैं -
      1. PROM (Programmable Read Only Memory)
      2. EPROM (Erasable Programmable Read Only Memory)
      3. EEPROM (Electrical Programmable Read Only Memory)

      1- PROM (Programmable Read Only Memory)

      PROM यानि प्रोग्राममेबल रीड ऑनली मेमोरी को केवल एक बार ही डाटा स्‍‍‍टोर किया जा सकता है यानि इसे मिटाया नहीं जा सकता है और ना ही बदला जा सकता है

      2- EPROM (Erasable Programmable Read Only Memory)

      EPROM का पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory होता है यह प्रोम (PROM) की तरह ही होता है लेकिन इसमें संग्रहित प्रोग्राम (Store Program) को पराबैगनी किरणों (Ultraviolet rays) के द्वारा ही मिटाया जा सकता है और नए प्रोग्राम संग्रहित (Store) किये जा सकते हैं

      3- EEPROM (Electrical Programmable Read Only Memory)

      EEPROM का पूरा नाम Electrical Programmable Read Only Memory होता हैं, एक नई तकनीक इ-इप्रोम (EEPROM) भी है जिसमे मेमोरी से प्रोग्राम को विधुतीय विधि से मिटाया जा सकता हैं